द लोकतंत्र/ कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती असंतोष की खबरों ने सियासी हलकों में हलचल बढ़ा दी है। पार्टी के कई बागी सांसदों द्वारा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात किए जाने के बाद राजनीतिक अटकलों का दौर तेज हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, बागी सांसदों का एक बड़ा समूह पार्टी नेतृत्व से नाराज है और भविष्य की रणनीति को लेकर सक्रिय रूप से विचार-विमर्श कर रहा है।
दिल्ली में हुई राजनीतिक बैठकों के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है। बताया जा रहा है कि टीएमसी के बागी सांसदों ने पहले वरिष्ठ भाजपा नेता भूपेंद्र यादव से मुलाकात की और इसके बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के आवास पहुंचे। इस दौरान स्पीकर आवास के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को और बल मिला।
TMC बागी गुट ने चुनाव चिह्न पर जताया दावा
बागी सांसदों के समूह की ओर से वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में पार्टी के मूल चुनाव चिह्न और संगठन पर दावा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि संसदीय नियमों और राजनीतिक प्रक्रिया के तहत यदि किसी दल के दो-तिहाई से अधिक सांसद किसी अलग समूह का हिस्सा बनते हैं, तो आगे चलकर पार्टी की पहचान और चुनाव चिह्न को लेकर दावा पेश किया जा सकता है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया तत्काल नहीं होती और इसके लिए संसदीय तथा कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। सूत्रों का दावा है कि बागी गुट आगामी संसद सत्र के दौरान अपनी रणनीति को और स्पष्ट कर सकता है। इस बीच टीएमसी सांसदों के एक समूह की लोकसभा स्पीकर से मुलाकात को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में कथित रूप से पार्टी की मौजूदा स्थिति, संसदीय मान्यता और भविष्य के विकल्पों पर चर्चा हुई है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
नई राजनीतिक राह की तलाश, TMC को लेकर कानूनी विवाद भी बढ़ा
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि बागी सांसद किसी अन्य क्षेत्रीय दल के साथ विलय या नए राजनीतिक मंच के गठन पर विचार कर सकते हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यह समूह पूर्वोत्तर भारत की एक राजनीतिक पार्टी के साथ जाने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहा है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दूसरी ओर, पार्टी के भीतर विवाद कानूनी मोड़ भी लेता दिखाई दे रहा है। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के पुत्र बैद्यनाथ घोष दस्तीदार ने कई वरिष्ठ नेताओं को कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में उन आरोपों का खंडन किया गया है, जिनमें उन पर राजनीतिक महत्वाकांक्षा के तहत विधानसभा टिकट मांगने का आरोप लगाया गया था।
उन्होंने संबंधित नेताओं से सार्वजनिक स्पष्टीकरण और माफी की मांग की है। इस घटनाक्रम ने टीएमसी के भीतर चल रहे आंतरिक मतभेदों को और उजागर कर दिया है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण रूप ले सकता है। यदि बागी सांसदों का समूह संगठित रूप से आगे बढ़ता है, तो इसका असर न केवल टीएमसी की आंतरिक राजनीति पर बल्कि राज्य की व्यापक राजनीतिक तस्वीर पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें पार्टी नेतृत्व और बागी खेमे के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।




