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TMC संकट के बीच शताब्दी रॉय का बड़ा बयान, बोलीं- जुलाई में साफ होगी तस्वीर, स्पीकर करेंगे फैसला

Shatabdi Roy's big statement amid TMC crisis, said - picture will be clear in July, speaker will decide

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी उथल-पुथल के बीच पार्टी की बागी सांसद शताब्दी रॉय का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने संकेत दिया है कि पार्टी के भीतर चल रहे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर जुलाई में शुरू होने वाले संसद सत्र के दौरान सामने आएगी। शताब्दी रॉय ने कहा कि फिलहाल कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन अंतिम स्थिति संसद सत्र के दौरान ही स्पष्ट होगी।

पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “अगला संसद सत्र जुलाई में है, तब हम देखेंगे कि क्या होता है।” लगातार उठ रहे सवालों पर उन्होंने हल्के अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मीडिया के सवालों ने उन्हें लगभग परेशान कर दिया है। हालांकि उन्होंने किसी बड़े राजनीतिक कदम की पुष्टि नहीं की और भविष्य की रणनीति पर खुलकर कुछ भी कहने से परहेज किया।

TMC के संसदीय नेतृत्व पर पहले होगा फैसला, फिर तय होगी आगे की राह

शताब्दी रॉय ने कहा कि फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा संसदीय दल के नेता और उपनेता के चयन का है। उनके अनुसार पहले यह तय किया जाएगा कि संसदीय दल का नेतृत्व कौन करेगा, उसके बाद आगे की राजनीतिक दिशा स्पष्ट होगी।

पिछले कुछ दिनों से तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों के बागी तेवर और पार्टी नेतृत्व से मतभेद की खबरें लगातार सुर्खियों में हैं। ऐसे में शताब्दी रॉय का बयान राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जुलाई का संसद सत्र टीएमसी के अंदर चल रहे शक्ति संघर्ष की दिशा तय कर सकता है। हालांकि शताब्दी रॉय ने यह स्पष्ट किया कि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी और आने वाले दिनों में कई राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।

स्पीकर से मुलाकात के बाद TMC के बागी नेताओं का NCPI में विलय का दावा

लोकसभा स्पीकर Om Birla से मुलाकात के बाद शताब्दी रॉय ने एक और महत्वपूर्ण दावा किया। उन्होंने कहा कि बागी सांसदों के समूह ने एनसीपीआई (नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया) के साथ विलय कर लिया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आगे की रणनीति परिस्थितियों के अनुसार तय की जाएगी।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर किसी प्रकार का दावा करने से इनकार किया। उनके अनुसार फिलहाल ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है और इस पूरे मामले में अंतिम निर्णय लोकसभा स्पीकर के स्तर पर होगा। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यदि बागी गुट संगठित रूप से आगे बढ़ता है तो इसका असर तृणमूल कांग्रेस की संसदीय स्थिति और राज्य की राजनीति दोनों पर पड़ सकता है।

फिलहाल सभी की निगाहें जुलाई में शुरू होने वाले संसद सत्र पर टिकी हैं, जहां यह साफ हो सकता है कि बागी सांसदों का अगला कदम क्या होगा और तृणमूल कांग्रेस इस चुनौती से कैसे निपटती है। आने वाले सप्ताह बंगाल की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

यह भी पढ़ें – अमेरिका-ईरान शांति समझौते का PM Narendra Modi ने किया स्वागत, बोले- पश्चिम एशिया में लौटेगी स्थिरता और व्यापार की आजादी

Team The Loktantra

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