द लोकतंत्र/ पटना : बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज पार्टी के सूत्रधार Prashant Kishor अब पहली बार चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। गुरुवार (2 जुलाई 2026) को पटना में आयोजित जन सुराज पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं ने संकेत दिए कि पटना की चर्चित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में प्रशांत किशोर को उम्मीदवार बनाया जा सकता है।
पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने बताया कि उम्मीदवार के चयन को लेकर अंतिम निर्णय 5 जुलाई को होने वाली कोर कमेटी की बैठक में लिया जाएगा। इसके बाद आधिकारिक तौर पर प्रत्याशी के नाम की घोषणा की जाएगी। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर प्रशांत किशोर के नाम की पुष्टि नहीं की, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बयानों से उनके चुनाव लड़ने की संभावना काफी मजबूत मानी जा रही है।
इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में जन सुराज के वरिष्ठ नेता और पूर्व एमएलसी रामबली चंद्रवंशी ने कहा कि बांकीपुर की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं की इच्छा है कि प्रशांत किशोर स्वयं चुनाव लड़ें। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर पार्टी के भीतर सकारात्मक माहौल है और अंतिम फैसला कोर कमेटी की बैठक के बाद सार्वजनिक किया जाएगा।
चुनाव आयोग की अधिसूचना के बाद तेज हुई हलचल, पहली बार चुनाव लड़ सकते हैं Prashant Kishor
जन सुराज की यह घोषणा ऐसे समय आई है जब भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को ही बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की अधिसूचना जारी की है। कार्यक्रम के अनुसार 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। यदि प्रशांत किशोर उम्मीदवार बनते हैं, तो यह उनके राजनीतिक जीवन का पहला प्रत्यक्ष चुनाव होगा। इससे पहले वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी उनके चुनाव लड़ने की चर्चाएं तेज थीं, लेकिन उन्होंने स्वयं चुनाव नहीं लड़ा था।
2025 के विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर ने जन सुराज के जरिए नई राजनीतिक शुरुआत करते हुए अपने दम पर सरकार बनाने का दावा किया था। हालांकि चुनाव परिणाम उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहे और पार्टी एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी। उस चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 202 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस बार प्रशांत किशोर स्वयं चुनाव मैदान में उतरते हैं, तो यह उनके लिए राजनीतिक संगठनकर्ता से जनप्रतिनिधि बनने की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा।
बांकीपुर सीट पर भाजपा का मजबूत रिकॉर्ड, प्रचार में पहले से सक्रिय हैं Prashant Kishor
बांकीपुर विधानसभा सीट को भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है। वर्ष 1995 से लगातार इस सीट पर भाजपा का कब्जा रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन के परिवार का इस क्षेत्र में लंबे समय से प्रभाव रहा है। उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा लगातार चार बार इस सीट से विधायक चुने गए थे। उनके निधन के बाद वर्ष 2006 के उपचुनाव में नितिन नवीन पहली बार विधायक बने और उसके बाद लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे।
पिछले कुछ सप्ताह से प्रशांत किशोर लगातार बांकीपुर क्षेत्र में विभिन्न वर्गों के लोगों से संवाद कर रहे हैं। वे स्थानीय नागरिकों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर क्षेत्र के मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। इन बैठकों के दौरान उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए मतदाताओं से बदलाव के पक्ष में मतदान करने की अपील भी की है।
प्रशांत किशोर ने अपने सार्वजनिक संवाद कार्यक्रमों में यह भी कहा है कि यदि मतदाता बांकीपुर सीट पर भाजपा को चुनौती देते हैं, तो इसका राजनीतिक संदेश राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक जाएगा। हालांकि, चुनावी मुकाबले की तस्वीर उम्मीदवारों की अंतिम घोषणा के बाद ही पूरी तरह साफ होगी। अब राजनीतिक हलकों की निगाहें 5 जुलाई को होने वाली जन सुराज की कोर कमेटी की बैठक पर टिकी हैं। यदि पार्टी प्रशांत किशोर के नाम पर मुहर लगाती है, तो बांकीपुर उपचुनाव बिहार की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में से एक बन सकता है।




