द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया गया एक वीडियो कुछ समय के लिए भारत में Restrict दिखाई देने लगा। इस घटनाक्रम ने सोशल मीडिया पर चर्चा छेड़ दी, क्योंकि यह वीडियो प्रधानमंत्री का युवाओं के नाम संदेश था, जिसे उन्होंने सेल्फी मोड में रिकॉर्ड कर साझा किया था। बाद में सोशल मीडिया कंपनी Meta ने इस मामले पर सफाई जारी करते हुए कहा कि वीडियो को गलती से प्रतिबंधित कर दिया गया था और तकनीकी त्रुटि का पता चलते ही उसे बहाल कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, वीडियो पर देर रात ‘See Why’ विकल्प पर क्लिक करने पर यह संदेश दिखाई दे रहा था कि ‘कानूनी अनुरोध (Legal Request) का पालन करते हुए इस कंटेंट को भारत में प्रतिबंधित किया गया है।’ इसके बाद इस मामले को लेकर सवाल उठे कि आखिर प्रधानमंत्री के आधिकारिक अकाउंट पर साझा किया गया वीडियो क्यों प्रतिबंधित हुआ। जब इस संबंध में मीडिया द्वारा Meta से जवाब मांगा गया, तो कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी सरकारी निर्देश या कानूनी आदेश के कारण नहीं, बल्कि एक तकनीकी त्रुटि की वजह से हुई थी। कंपनी ने कहा कि गलती का पता चलते ही वीडियो को दोबारा सामान्य रूप से उपलब्ध करा दिया गया।
जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान साझा किया गया था वीडियो, Meta ने किया बैन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह वीडियो उस समय साझा किया था, जब जंतर-मंतर पर छात्र संगठन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े प्रदर्शनकारी कथित NEET परीक्षा विवाद को लेकर आंदोलन कर रहे थे। उस दौरान शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी थी।
वीडियो में प्रधानमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा था कि सरकार ने परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया है और सुधार की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है और इस संबंध में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया था। हालांकि, कुछ समय के लिए इसके भारत में प्रतिबंधित दिखाई देने के बाद इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं।
Meta ने बदला फैसला, तकनीकी गलती बताकर वीडियो किया बहाल
Meta ने अपने आधिकारिक जवाब में कहा कि प्रधानमंत्री के वीडियो पर लगाया गया प्रतिबंध अनजाने में हुई तकनीकी त्रुटि का परिणाम था। कंपनी के अनुसार, जैसे ही इस गलती की जानकारी मिली, उसे तुरंत ठीक कर दिया गया और वीडियो दोबारा सभी उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध करा दिया गया। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि वीडियो हटाने या प्रतिबंधित करने के पीछे किसी प्रकार का जानबूझकर लिया गया निर्णय नहीं था। Meta की सफाई के बाद वीडियो सामान्य रूप से दिखाई देने लगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की कंटेंट मॉडरेशन प्रक्रिया और तकनीकी निगरानी को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक महत्व के खातों और सरकारी संदेशों से जुड़े कंटेंट पर इस तरह की तकनीकी त्रुटियां व्यापक बहस का विषय बन सकती हैं। फिलहाल, Meta की ओर से वीडियो बहाल किए जाने के बाद यह मामला शांत होता दिखाई दे रहा है। हालांकि, इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की पारदर्शिता, कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम और तकनीकी प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।



