द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : लोकसभा में लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद Akhilesh Yadav ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और युवाओं के आंदोलन का उल्लेख करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। इसी दौरान उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का जिक्र करते हुए तंज कसा कि एक प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया।
अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों के आंदोलन को वह लंबे समय से देख रहे थे और यह आंदोलन धीरे-धीरे इतना बड़ा हो गया कि सरकार को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी। उन्होंने दावा किया कि शुरुआत में जिस आंदोलन को गंभीरता से नहीं लिया गया, उसी ने बाद में सरकार को फैसले लेने पर मजबूर कर दिया। हालांकि, सरकार की ओर से पहले ही कहा जा चुका है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए कई कदम उठाए गए हैं और लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
Akhilesh Yadav ने युवाओं के आंदोलन और पेपर लीक पर सरकार को घेरा
सपा प्रमुख ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में भी भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय केवल वादे कर रही है। अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार छात्रों की सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। उन्होंने किसानों के आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले सरकार ने विरोध प्रदर्शनों को महत्व नहीं दिया, लेकिन बाद में तीन कृषि कानून वापस लेने पड़े। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि ‘झुकाने वाला चाहिए, सरकार भी झुकती है।‘ उनका कहना था कि लोकतंत्र में जनदबाव और शांतिपूर्ण आंदोलन सरकारों को फैसले बदलने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
अखिलेश यादव ने दावा किया कि यह पहला ऐसा आंदोलन था, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं के साथ उनके अभिभावकों ने भी खुलकर समर्थन दिया। उनके अनुसार, यह आंदोलन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में इसकी गूंज सुनाई दी।
NTA, आउटसोर्सिंग और शिक्षा व्यवस्था पर भी Akhilesh Yadav ने उठाए सवाल
लोकसभा में अपने भाषण के दौरान अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा संचालन और उससे जुड़े कार्यों में आउटसोर्सिंग की व्यवस्था अपनाई जा रही है, तो किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में जवाबदेही किसकी होगी। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सरकार के कार्यकाल में कई भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि शिक्षा व्यवस्था को लगातार कमजोर किया जा रहा है। हालांकि, इन दावों पर सरकार की ओर से अलग रुख अपनाया गया है। केंद्र सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए कानून में संशोधन, सख्त दंड के प्रावधान और संस्थागत सुधार किए जा रहे हैं।
अखिलेश यादव ने सरकार की आउटसोर्सिंग नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष को आशंका है कि कहीं शासन व्यवस्था के अधिक क्षेत्रों में भी यही मॉडल लागू न कर दिया जाए। उन्होंने मांग की कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े मामलों में स्पष्ट जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
लोकसभा में दिए गए अखिलेश यादव के इन बयानों के बाद शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली और युवाओं के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। एक ओर विपक्ष सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है, तो दूसरी ओर केंद्र सरकार का कहना है कि वह परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।




