द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा विवाद को लेकर संसद परिसर में हुए विपक्षी प्रदर्शन के बाद सियासत लगातार गरमाई हुई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi, पूर्णिया सांसद पप्पू यादव समेत कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) भी खुलकर उनके समर्थन में आ गई है। टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने रविवार (2 अगस्त) को राहुल गांधी और पप्पू यादव का बचाव करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला।
सौगत रॉय ने आरोप लगाया कि भाजपा विरोध की आवाज़ उठाने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की राजनीति करती है। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना जनप्रतिनिधियों का अधिकार है और विपक्ष इसी अधिकार का इस्तेमाल कर रहा था। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी और पप्पू यादव ने कोई गलत काम नहीं किया, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दे को उठाने का प्रयास किया।
क्या है पूरा मामला? संसद परिसर में प्रदर्शन के बाद दर्ज हुई FIR
पूरा विवाद संसद परिसर में 31 जुलाई को हुए एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर से जुड़े कथित चंदा घोटाले के आरोपों को लेकर सांकेतिक प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन के दौरान पूर्णिया सांसद पप्पू यादव गेरुए वस्त्र पहनकर पुजारी के वेश में नजर आए। उनके हाथ में एक दानपेटी भी थी, जिसके जरिए कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे को प्रतीकात्मक तरीके से उठाया गया।
प्रदर्शन में राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसद मौजूद थे। इसके बाद इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया और वाराणसी में राहुल गांधी, पप्पू यादव तथा अन्य विपक्षी नेताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में धार्मिक भावनाओं को आहत करने और सनातन परंपराओं के अपमान का आरोप लगाया गया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार कथित चंदा गड़बड़ी जैसे गंभीर आरोपों की जांच करने के बजाय उन लोगों पर कार्रवाई कर रही है, जिन्होंने इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाया। उनके मुताबिक, यदि किसी धार्मिक संस्था से जुड़े आर्थिक मामलों पर सवाल उठते हैं तो सरकार की प्राथमिकता उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
BJP ने प्रदर्शन को बताया धार्मिक भावनाओं का अपमान, विपक्ष ने कहा- लोकतांत्रिक विरोध
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के इस प्रदर्शन की कड़ी आलोचना की है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि संसद परिसर में जिस तरह का नाटक किया गया, उससे सनातन धर्म और धार्मिक परंपराओं का अपमान हुआ है। पार्टी ने प्रदर्शन में शामिल नेताओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है। वहीं विपक्ष का कहना है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह लोकतांत्रिक और सांकेतिक था। विपक्षी दलों का दावा है कि उनका उद्देश्य किसी धर्म या धार्मिक आस्था का अपमान करना नहीं, बल्कि कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे को जनता के सामने रखना था।
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने भी इसी तर्क का समर्थन करते हुए कहा कि भाजपा विरोधी नेताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध की आवाज़ को कानूनी कार्रवाई के जरिए दबाया नहीं जा सकता। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर भाजपा इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा गंभीर मामला बता रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस, टीएमसी और अन्य विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा बता रहे हैं। अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया और आगे की राजनीतिक प्रतिक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।




