द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : कर्नाटक के मुख्यमंत्री DK Shivakumar ने महिलाओं की शक्ति, संघर्ष और योगदान की सराहना करते हुए कहा कि समाज और राज्य के विकास में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। बुधवार (2 सितंबर) को ‘उबुंटू कंसोर्टियम ऑफ वूमेन एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन’ की ओर से आयोजित ‘टुगेदर वी ग्रो-इंटरनेशनल वूमेन एंटरप्रेन्योरशिप डे’ के पांचवें संस्करण के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री ने महिला उद्यमियों को संबोधित किया।
कार्यक्रम के दौरान डीके शिवकुमार ने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि सीता का चरित्र भगवान राम से भी कहीं ज्यादा बड़ा है और महिलाओं को उनसे सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने हमेशा चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी पहचान बनाई है। जो महिलाएं कठिन परिस्थितियों के बावजूद कारोबार और उद्यम खड़े कर रही हैं, वे समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण हैं। मुख्यमंत्री ने महिला उद्यमियों से राज्य की प्रगति में आगे बढ़कर नेतृत्व करने की अपील की। उन्होंने कहा कि महिलाओं की क्षमता, रचनात्मकता और दृढ़ इच्छाशक्ति को पूंजी, तकनीक और बाजार तक पहुंच मिले तो उनके लिए संभावनाओं की कोई सीमा नहीं है।
‘ग्राम पंचायत से संसद तक महिलाओं के नेतृत्व की जरूरत’
डीके शिवकुमार ने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व की जरूरत केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। ग्राम पंचायतों से लेकर संसद तक महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और उनके लिए ऐसा माहौल तैयार करना सरकार की जिम्मेदारी है, जिसमें वे अपनी प्रतिभा और क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर सकें।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं को सृजनकर्ता, समस्या का समाधान निकालने वाली और निर्णय लेने वाली शक्ति बताया। उनके मुताबिक, महिलाएं परिवार और संसाधनों के प्रबंधन से लेकर व्यवसाय खड़ा करने तक कई जिम्मेदारियां निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने चुनौतियों को अवसरों में बदलने की क्षमता बार-बार साबित की है।
डीके शिवकुमार ने इस दौरान कांग्रेस सरकार की पांच गारंटी योजनाओं का भी जिक्र किया। इनमें शक्ति, गृह लक्ष्मी, गृह ज्योति, अन्न भाग्य और युवा निधि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि शक्ति योजना के तहत महिलाओं को राज्य की सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है, जिससे उनके आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन गारंटी योजनाओं का विरोध किया था।
‘महिलाएं सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं’, गृह लक्ष्मी योजना का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख करते हुए गृह लक्ष्मी योजना की भी बात की। उन्होंने कहा कि इसके तहत राज्य की करीब 1.22 करोड़ महिलाओं को 2,000 रुपये प्रति महिला दिए जाते हैं। उनके अनुसार, इस आर्थिक सहायता से महिलाओं को परिवार के भरण-पोषण में मदद मिली है। उन्होंने महिलाओं के लिए लागू अन्य योजनाओं का भी उल्लेख किया, जिनमें चार प्रतिशत ब्याज पर ऋण, सब्सिडी और स्त्री शक्ति योजना शामिल हैं। डीके शिवकुमार ने यह भी कहा कि हर साल स्नातक होने वाले डॉक्टरों में करीब 40 प्रतिशत महिलाएं हैं।
महिला उद्यमियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं की भूमिका घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “आप रसोई तक ही सीमित नहीं हैं।” मुख्यमंत्री का संदेश था कि महिलाएं कारोबार, प्रशासन, राजनीति, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में नेतृत्व करते हुए कर्नाटक की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।




