द लोकतंत्र/संयुक्त राष्ट्र महासभा : संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र की प्रथम समिति में भारत ने पाकिस्तान के बयानों पर कड़ा जवाब दिया है। भारत के राजनयिक Anmol Sher Singh Bedi ने आतंकवाद, परमाणु प्रसार और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भारत का पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि देश किसी भी तरह के परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेगा। उन्होंने कहा कि सीमा पार से होने वाले आतंकी हमलों के खिलाफ भारत के पास आत्मरक्षा का अधिकार सुरक्षित है। 9 अक्टूबर को हुई बैठक में पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने के बाद भारत ने जवाब देने के अधिकार (Right of Reply) का इस्तेमाल किया। इस दौरान बेदी ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद मई 2025 में की गई भारत की सैन्य कार्रवाई का बचाव किया और कहा कि परमाणु हथियारों को कूटनीति के सामान्य औजार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
पहलगाम हमले के बाद भारत की कार्रवाई पर क्या बोले Anmol Sher Singh Bedi?
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के तहत सैन्य कार्रवाई की थी। संयुक्त राष्ट्र में भारत का पक्ष रखते हुए Anmol Sher Singh Bedi ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद भारत ने गंभीर उकसावे के जवाब में आत्मरक्षा के तहत कदम उठाया। उनके मुताबिक, भारत की कार्रवाई नपी-तुली और लक्षित थी तथा इसका उद्देश्य संघर्ष को और बढ़ने से रोकना था। बेदी ने स्पष्ट किया कि गैर-सरकारी तत्वों के जरिए हिंसा कराने से किसी देश की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि भारत का आत्मरक्षा का अधिकार बरकरार है और किसी भी आतंकी हमले का उचित जवाब दिया जाएगा।
भारत ने गिनाईं तीन स्पष्ट नीतियां
Anmol Sher Singh Bedi ने अपने संबोधन में आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर भारत के तीन प्रमुख सिद्धांत सामने रखे।
1.आतंकी हमले का जवाब: भारत के खिलाफ किसी भी आतंकी हमले का उचित और प्रभावी जवाब दिया जाएगा।
2.परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकेंगे: परमाणु हथियारों की धमकी भारत को अपनी सुरक्षा से जुड़े फैसले लेने से नहीं रोक सकती।
3.आतंकवाद पर समान जवाबदेही: आतंकवाद को समर्थन देने वालों और उसकी साजिश रचने वालों के बीच भारत कोई अंतर नहीं करेगा।
Anmol Sher Singh Bedi ने यह भी कहा कि परमाणु हथियारों को राज्य की सामान्य कूटनीतिक नीति का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत के अनुसार, परमाणु धमकियों के जरिए आतंकवाद से जुड़े मामलों में जवाबदेही से बचने की कोशिश क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।
सिंधु जल संधि पर भी भारत ने रखी अपनी बात
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि का भी उल्लेख किया। बेदी ने कहा कि यह समझौता आपसी सद्भाव और विश्वास की भावना पर आधारित था। उन्होंने तर्क दिया कि कोई देश यदि उस विश्वास को कमजोर करता है, तो वह संधि से मिलने वाले लाभों को बिना किसी बदलाव के जारी रखने की अपेक्षा नहीं कर सकता। यह मुद्दा पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में आए तनाव के बीच अहम है। भारत ने हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला घोषित किया था।
AQ खान नेटवर्क का जिक्र, परमाणु प्रसार पर सतर्कता की अपील: Anmol Sher Singh Bedi
भारत ने अपने संबोधन में पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कदीर खान से जुड़े परमाणु प्रसार नेटवर्क का भी उल्लेख किया। Anmol Sher Singh Bedi ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1540 का हवाला देते हुए परमाणु तकनीक और उन्नत सैन्य क्षमताओं के हस्तांतरण को लेकर सतर्कता बरतने की जरूरत बताई। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संबंधित आपूर्तिकर्ताओं से परमाणु सहयोग के मामलों में उच्च स्तर की निगरानी रखने की अपील की। भारत का कहना था कि परमाणु तकनीक का प्रसार केवल किसी एक देश की सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा है।
जम्मू-कश्मीर पर भारत का रुख दोहराया
बैठक के दौरान भारत ने जम्मू-कश्मीर को अपना अभिन्न और अविभाज्य अंग बताते हुए पाकिस्तान के दावों को खारिज किया। Anmol Sher Singh Bedi ने पाकिस्तान के कब्जे वाले भारतीय क्षेत्रों को खाली करने की मांग भी दोहराई। भारत ने कहा कि वह शांति का समर्थक है, लेकिन शांति बनाए रखने के लिए गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाइयों की जवाबदेही भी जरूरी है। बेदी के मुताबिक, यदि ऐसी कार्रवाइयों के लिए जिम्मेदारी तय नहीं होती, तो शांति केवल दो संकटों के बीच का अस्थायी विराम बनकर रह जाती है।
UN में भारत का संदेश: शांति के साथ सुरक्षा भी जरूरी
संयुक्त राष्ट्र में भारत के Anmol Sher Singh Bedi के बयान का मुख्य संदेश यह रहा कि देश शांति और स्थिरता का समर्थन करता है, लेकिन आतंकवाद और परमाणु धमकियों के सामने अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। पहलगाम हमले के बाद की सैन्य कार्रवाई, सिंधु जल संधि और परमाणु प्रसार जैसे मुद्दों को उठाकर भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सुरक्षा संबंधी चिंताओं को रेखांकित किया। इस बयान से एक बार फिर स्पष्ट हुआ कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई और उससे जुड़े मामलों में जवाबदेही को अपनी विदेश नीति के अहम मुद्दों के रूप में पेश कर रहा है।
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