द लोकतंत्र: Bhandara Farmer Suicide की घटना ने महाराष्ट्र के भंडारा जिले में बारिश की कमी और फसल नुकसान से किसानों के सामने पैदा हुई मुश्किलों को सामने ला दिया है। जिले के मोहाड़ी तालुका के धोप गांव में 55 वर्षीय किसान राजेंद्र अमर सपाटे की मौत हो गई। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, इस साल पर्याप्त बारिश नहीं होने से उनकी धान की फसल को भारी नुकसान हुआ था। घटना 8 अक्टूबर को सामने आई। बताया गया है कि सपाटे के पास करीब पांच एकड़ जमीन थी और इसी पर वह खेती करते थे।
पांच एकड़ में की थी धान की खेती
राजेंद्र सपाटे धोप गांव के रहने वाले थे और उनके पास करीब पांच एकड़ कृषि भूमि थी। इस साल उन्होंने धान की खेती की थी, लेकिन बारिश के लंबे अंतराल के कारण खेतों में फसल को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाया। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, बारिश की कमी से धान की फसल सूखकर खराब हो गई थी। इससे किसान को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
भंडारा को विदर्भ का प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्र माना जाता है। इस साल जिले के कई हिस्सों में बारिश के असमान वितरण और लंबे सूखे अंतराल ने खरीफ फसलों पर असर डाला है। किसानों ने अधिकारियों के सामने भी फसल नुकसान और आर्थिक परेशानी का मुद्दा उठाया है।
पालकमंत्री के सामने भी रखी थी परेशानी
रिपोर्टों के अनुसार, घटना से कुछ दिन पहले ही राजेंद्र सपाटे ने जिले के पालकमंत्री पंकज भोयर के सामने अपनी कृषि संबंधी परेशानी रखी थी। मंत्री ने अक्टूबर की शुरुआत में तुमसर और मोहाड़ी क्षेत्रों का दौरा कर किसानों से बातचीत की थी और खेतों में फसल की स्थिति का जायजा लिया था।
इस दौरान किसानों ने बताया था कि बारिश की कमी के कारण धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है। कई किसानों ने मोहाड़ी और तुमसर को भी सूखा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल करने की मांग की थी। प्रशासन की ओर से फसल नुकसान का वस्तुनिष्ठ आकलन और पंचनामा करने की प्रक्रिया पर जोर दिया जा रहा है।
भंडारा में बारिश की कमी से बढ़ी मुश्किल
2026 के जून से सितंबर के दौरान भंडारा जिले में सामान्य 1,157 मिमी के मुकाबले करीब 849.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य बारिश का लगभग 73.4 प्रतिशत है। कम बारिश का असर जिले की खरीफ फसलों पर पड़ा है। राज्य सरकार ने भंडारा, पवनी और लाखांदूर तहसीलों को सूखा प्रभावित स्थिति में शामिल किया है, जबकि तुमसर, मोहाड़ी, साकोली और लाखनी को इस सूची से बाहर रखा गया था।
जिले में इस साल करीब 1.98 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई हुई थी। धान की खेती इसका बड़ा हिस्सा है। बारिश की कमी के कारण किसानों को सिंचाई, उत्पादन और संभावित आय में कमी की चिंता बनी हुई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का आकलन, राहत और अन्य आवश्यक उपायों पर काम किया जा रहा है।
फसल नुकसान के आकलन पर प्रशासन का जोर
भंडारा में फसल नुकसान का आकलन करने के लिए अधिकारियों को खेतों का निरीक्षण और पंचनामा प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को भू-राजस्व में राहत, कृषि ऋण के पुनर्गठन, बिजली बिल में राहत और रोजगार से जुड़े उपायों का प्रावधान किया गया है। फसल नुकसान के आधार पर वित्तीय सहायता से संबंधित प्रक्रिया भी प्रशासनिक आकलन के बाद आगे बढ़ाई जानी है।
राजेंद्र सपाटे की मौत ने एक बार फिर कम बारिश, फसल नुकसान और किसानों पर पड़ने वाले आर्थिक दबाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है। घटना की परिस्थितियों और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ी विस्तृत जानकारी संबंधित अधिकारियों की जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के आधार पर स्पष्ट होगी।



