द लोकतंत्र/ रायपुर : केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के Jagdalpur में आयोजित सेंट्रल ज़ोनल काउंसिल (CZC) की 26वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए न्याय व्यवस्था, नक्सलवाद, साइबर अपराध और विकास जैसे कई अहम मुद्दों पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट को पांच साल से ज्यादा समय से लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतों का गठन करना चाहिए।
गृह मंत्री ने यह भी कहा कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण कानून यानी Protection of Children from Sexual Offences Act (POCSO) और रेप मामलों में यदि समय पर DNA टेस्टिंग की जाए, तो दोषसिद्धि दर 100 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
बस्तर में हुई सेंट्रल ज़ोनल काउंसिल की अहम बैठक
बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
अमित शाह ने कहा कि यह बेहद खुशी की बात है कि ‘नक्सल मुक्त भारत’ के ऐतिहासिक लक्ष्य की दिशा में बड़ी सफलता के बाद यह बैठक बस्तर में आयोजित की जा रही है।
‘नक्सल मुक्त भारत का श्रेय जवानों को’
गृह मंत्री ने कहा कि भारत को नक्सलवाद से मुक्त बनाने का पूरा श्रेय सुरक्षा बलों की बहादुरी और समर्पण को जाता है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF), राज्य पुलिस और खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की वजह से नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई संभव हो पाई।
उन्होंने कहा कि सरकार सिर्फ सुरक्षा अभियान ही नहीं चला रही, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्य भी तेजी से किए जा रहे हैं। अमित शाह ने कहा, “हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, क्योंकि ये इलाके दशकों तक विकास से पीछे रहे हैं। जब तक ये क्षेत्र देश के बाकी हिस्सों के बराबर नहीं पहुंच जाते, तब तक प्रयास जारी रहेंगे।”
POCSO और रेप मामलों में DNA टेस्टिंग पर जोर
अमित शाह ने कहा कि गंभीर अपराधों में वैज्ञानिक जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि POCSO और रेप मामलों में समय पर DNA टेस्टिंग सुनिश्चित की जाए, तो दोषियों को सजा दिलाने की संभावना काफी बढ़ सकती है। उन्होंने प्रशासन को निर्देश देते हुए कहा कि गंभीर अपराधों से निपटने में संवेदनशीलता और गंभीरता दोनों जरूरी हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि पांच साल से अधिक समय से लंबित मामलों के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाना चाहिए ताकि लोगों को समय पर न्याय मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य होना चाहिए कि 2029 से पहले हर आपराधिक मामले का निपटारा सुनिश्चित हो जाए, चाहे मामला सुप्रीम कोर्ट तक ही क्यों न पहुंचा हो।
साइबर क्राइम और मिलावटखोरी पर भी फोकस
अमित शाह ने राज्यों से 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन को केंद्रीय गृह मंत्रालय के मॉडल के अनुसार लागू करने और कॉल सेंटरों के आधुनिकीकरण का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और उनसे निपटने के लिए तकनीकी व्यवस्था मजबूत करना जरूरी है। खाद्य पदार्थों में मिलावट के मामलों पर उन्होंने कहा कि दोषी संस्थानों पर लगे जुर्मानों का व्यापक प्रचार होना चाहिए ताकि लोगों में जागरूकता बढ़े।
शिक्षा, पोषण और बैंकिंग सुविधाओं पर भी चर्चा
बैठक में जल जीवन मिशन-2, पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्तीय समावेशन और बिजली सुधार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। अमित शाह ने स्कूल ड्रॉपआउट दर कम करने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि पांच किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराना बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि ज्यादातर सरकारी योजनाएं अब डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से जुड़ी हैं।
‘मोदी सरकार में मजबूत हुआ संघीय ढांचा’
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में देश का संघीय ढांचा और मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि 2004 से 2014 के बीच जहां ज़ोनल काउंसिल की केवल 11 बैठकें हुई थीं, वहीं 2014 से 2026 के बीच 32 बैठकें आयोजित की गईं। उन्होंने यह भी कहा कि इस दौरान 1,729 मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें से करीब 80 प्रतिशत मामलों का समाधान किया जा चुका है।

