द लोकतंत्र/ पटना : Bihar में विभिन्न छात्र संगठनों और कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े युवा संगठनों द्वारा आयोजित प्रदर्शन और बिहार बंद के दौरान हुई हिंसा को लेकर बिहार पुलिस मुख्यालय ने विस्तृत जानकारी जारी की है। पुलिस के अनुसार, राज्यभर में कानून-व्यवस्था प्रभावित होने के बाद कुल 694 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें सत्यापन के बाद 339 नाबालिगों और छात्रों को छोड़ दिया गया, जबकि हिंसक घटनाओं में कथित संलिप्तता पाए जाने पर 355 लोगों को न्यायिक प्रक्रिया के लिए अदालत में पेश किया गया।
पुलिस मुख्यालय ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर हिंसा, पथराव और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी घायल हुए। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई, जबकि पूरे घटनाक्रम की जांच भी जारी है।
Bihar: 91 पुलिसकर्मी घायल, सरकारी संपत्ति को नुकसान; कई अधिकारी गंभीर रूप से जख्मी
बिहार पुलिस मुख्यालय के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान राज्य के अलग-अलग जिलों में 91 पुलिस अधिकारी और जवान घायल हुए। घायलों में सीवान और सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक, दो अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) और कई थाना प्रभारी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, गांधी मैदान थाना प्रभारी को भी गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि हिंसा के दौरान 14 सरकारी वाहनों को क्षतिग्रस्त किया गया, जबकि एक सरकारी वाहन में आग लगा दी गई। इसके अलावा 13 आम नागरिकों के घायल होने की भी जानकारी दी गई है।
सारण जिले में हुई हिंसा के दौरान सदर प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, उनकी एक आंख की रोशनी प्रभावित हुई है और उनका इलाज पटना स्थित आईजीआईएमएस में चल रहा है। वहीं रिविलगंज के बीडीओ पर हुए हमले में उनके सिर में गंभीर चोट आई, जिसके बाद उनकी सर्जरी मेदांता अस्पताल में की गई। पुलिस का कहना है कि दोनों अधिकारी फिलहाल उपचाराधीन हैं।
AK-47 फायरिंग मामले पर Bihar पुलिस का पक्ष, सिपाही निलंबित; जांच जारी
बिहार पुलिस मुख्यालय ने सीवान में कथित AK-47 फायरिंग को लेकर भी अपना पक्ष रखा है। पुलिस के मुताबिक, 25 जुलाई को जेपी चौक के पास प्रदर्शनकारियों से घिरने के बाद सिपाही अभिषेक कुमार ने सरकारी संपत्ति और पुलिस बल की सुरक्षा के उद्देश्य से चार राउंड हवाई फायरिंग की थी। पुलिस का दावा है कि इस फायरिंग से भीड़ में मौजूद किसी व्यक्ति के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, घटना के बाद सिपाही अभिषेक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
वहीं, गोली लगने से घायल हुए मो. आरिफ, आकाश कुमार और बुलेट कुमार गौड़ के बयान के आधार पर सीवान नगर थाना में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार, तीनों युवक जेपी चौक से लगभग डेढ़ से दो किलोमीटर दूर अलग-अलग स्थानों पर घायल हुए थे। चिकित्सकों के हवाले से पुलिस ने बताया कि तीनों की हालत खतरे से बाहर है और मो. आरिफ को अस्पताल से छुट्टी भी मिल चुकी है।
सीवान के पुलिस अधीक्षक पूरन झा ने कहा कि प्रारंभिक जांच में AK-47 की गोली से किसी के घायल होने की पुष्टि नहीं हुई है। उनके अनुसार, घटना के समय डीआईयू (जिला आसूचना इकाई) की टीम एक अन्य मामले की जांच के सिलसिले में उस क्षेत्र से गुजर रही थी। उन्होंने बताया कि पूरे प्रकरण की कमिश्नर और डीआईजी स्तर पर संयुक्त जांच कराई जा रही है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
उधर, इस मामले को लेकर विपक्ष और छात्र संगठनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि बिहार पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में अब इस पूरे घटनाक्रम पर संयुक्त जांच रिपोर्ट और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।



