द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के सफदरजंग इलाके में जज अमन कुमार शर्मा की आत्महत्या के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। पुलिस ने इस संवेदनशील मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच को तेज कर दिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जज अमन कुमार शर्मा ने अपने ग्रीन पार्क स्थित आवास पर फांसी लगाकर आत्महत्या की थी, जिसके बाद पूरे न्यायिक और प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई है।
दिल्ली पुलिस ने मृतक के पिता की शिकायत के आधार पर सफदरजंग एन्क्लेव थाने में एफआईआर संख्या 152/26 दर्ज की है। यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।
पत्नी और रिश्तेदार पर गंभीर आरोप, पारिवारिक विवाद की जांच
एफआईआर में जज अमन कुमार शर्मा की पत्नी स्वाति मलिक और उनकी चचेरी बहन निधि मलिक का नाम सामने आया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन दोनों ने कथित रूप से मानसिक दबाव बनाकर उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाया। शुरुआती जांच में पति-पत्नी के बीच तनाव और विवाद की बात भी सामने आई है, जिसे पुलिस गंभीरता से जांच रही है।
घटना दक्षिणी दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में हुई, जहां जज अपने आवास पर मृत पाए गए। पुलिस को इस घटना की जानकारी उनके जीजा शिवम कुमार द्वारा PCR कॉल के जरिए दी गई थी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मौके से कोई सुसाइड नोट मिला है या नहीं।
आत्महत्या से पहले पिता को कॉल, मानसिक तनाव की आशंका
जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि आत्महत्या से एक रात पहले अमन कुमार शर्मा ने अपने पिता को फोन किया था। परिवार के अनुसार, बातचीत के दौरान वह बेहद परेशान नजर आ रहे थे और उन्होंने कहा था कि उनका जीवन बेहद कठिन हो गया है। हालांकि, उन्होंने परेशानी का स्पष्ट कारण नहीं बताया, जिससे मामला और रहस्यमय बन गया है।
जज अमन कुमार शर्मा ने वर्ष 2021 में दिल्ली न्यायिक सेवा में अपनी नियुक्ति के साथ करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने Symbiosis Law School से विधि की पढ़ाई पूरी की थी और न्यायिक प्रणाली में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। पिछले एक वर्ष से वे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में सचिव के पद पर कार्यरत थे।
यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि न्यायिक प्रणाली से जुड़े अधिकारियों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्यस्थल के दबाव पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस अब सभी आरोपों और परिस्थितियों की गहनता से जांच कर रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके।

