द लोकतंत्र/पटना: बिहार की नई सरकार के गठन के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर संवैधानिक पदों के बंटवारे को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद अब विधान परिषद के सभापति पद को जनता दल यूनाइटेड (JDU) के खाते में दिए जाने की चर्चा तेज हो गई है। अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे को व्यक्तिगत कारणों के बजाय बिहार में NDA के भीतर सत्ता संतुलन और संवैधानिक पदों के बंटवारे से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, भाजपा और JDU के बीच इस बात को लेकर सहमति बनी है कि विधान परिषद के सभापति का पद अब JDU को दिया जाए।
NDA में क्या चल रह है, क्यों दिया गया इस्तीफा?
नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री का पद भाजपा के पास है और विधानसभा अध्यक्ष का पद भी भाजपा के पास है। ऐसे में विधान परिषद के सभापति का पद JDU को दिए जाने की चर्चा NDA के भीतर दोनों प्रमुख सहयोगी दलों के बीच पदों के संतुलन से जुड़ी हुई है।
हालांकि, अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के पीछे भाजपा नेतृत्व के निर्देश की बात विभिन्न रिपोर्टों में कही गई है, लेकिन इसे लेकर सार्वजनिक रूप से सामने आई आधिकारिक जानकारी और राजनीतिक सूत्रों के दावों में अंतर हो सकता है। इसलिए इसे फिलहाल रिपोर्टों में सामने आए घटनाक्रम के रूप में देखना उचित है।
JDU से किसे मिल सकती है जिम्मेदारी?
अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद JDU के मौजूदा उपसभापति प्रो. (डॉ.) रामवचन राय का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें पहले कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी दी जा सकती है और इसके बाद सभापति पद के लिए संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
रामवचन राय लंबे समय से बिहार विधान परिषद से जुड़े रहे हैं। बिहार विधान परिषद की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वह 24 जुलाई 2024 से उपसभापति पद पर हैं।
NDA में क्यों बदला समीकरण?
दरअसल, बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद NDA के भीतर प्रमुख संवैधानिक पदों के संतुलन को लेकर चर्चा तेज हुई। मौजूदा समीकरण में मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष का पद भाजपा के पास होने के कारण विधान परिषद सभापति का पद JDU को देने की संभावना को गठबंधन के भीतर संतुलन बनाने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, JDU की ओर से विधान परिषद सभापति पद को लेकर दावेदारी सामने आई थी। इसके बाद भाजपा और JDU के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस पद को लेकर सहमति बनने की बात कही गई।
अब आगे क्या होगा?
अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद अगला महत्वपूर्ण कदम विधान परिषद के नए सभापति को लेकर होगा। फिलहाल रामवचन राय का नाम सबसे प्रमुख संभावित चेहरे के तौर पर चर्चा में है, लेकिन अंतिम फैसला संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होगा।
इस घटनाक्रम को बिहार NDA में भाजपा और JDU के बीच सत्ता संतुलन के नए फॉर्मूले के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि JDU की ओर से किसे औपचारिक रूप से सभापति पद के लिए आगे किया जाता है।
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