द लोकतंत्र/ नई दिल्ली डेस्क : Pakistan इस समय गंभीर आर्थिक दबाव से गुजर रहा है और इसकी एक बड़ी वजह United States और Iran के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई दे रहा है, जिससे कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है। इसका सीधा असर पाकिस्तान जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ‘The News International’ की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान सरकार हालात को संभालने के लिए कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्गों में रुकावट की आशंका के कारण वैश्विक बाजार में ऊर्जा आपूर्ति सीमित बनी हुई है। यही वजह है कि तेल और गैस की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। एशिया के कई देशों की तरह पाकिस्तान भी ऊर्जा जरूरतों के लिए बाहरी देशों पर निर्भर है, इसलिए वहां ईंधन की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि हाल के दिनों में थोड़ी राहत मिली है, लेकिन स्थिति अब भी अस्थिर बनी हुई है।
बिजली कटौती, गैस संकट और कारोबार में 200 अरब रुपये का नुकसान
Pakistan में बढ़ती ईंधन कीमतों का असर अब पूरे ऊर्जा तंत्र पर दिखने लगा है। देश के कई हिस्सों में बिजली कटौती और गैस की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। महंगे ईंधन का असर बिजली बिलों पर भी पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार बिजली नियामक फरवरी के फ्यूल एडजस्टमेंट के तहत प्रति यूनिट 1.42 पाकिस्तानी रुपये की अतिरिक्त वसूली की तैयारी कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट गर्मियों तक जारी रहा, जब बिजली की मांग अपने चरम पर होती है, तो आम जनता पर आर्थिक बोझ और बढ़ सकता है। सरकार ऊर्जा बचाने के लिए बाजार और दुकानों को जल्दी बंद कराने जैसे कदम उठा रही है, लेकिन इन फैसलों पर सवाल भी उठने लगे हैं।
Chainstore Association of Pakistan का दावा है कि दुकानों को जल्दी बंद करने के फैसले से सिर्फ दो हफ्तों में करीब 200 अरब पाकिस्तानी रुपये के कारोबार का नुकसान हुआ है। एसोसिएशन के मुताबिक संगठित रिटेल स्टोर्स को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, जबकि छोटी और अनौपचारिक मार्केट्स पर इसका असर कम पड़ा है। इससे बाजार में असमानता बढ़ रही है और ऊर्जा बचत का वास्तविक लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पा रहा। कुल मिलाकर पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अगर वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ तो ऊर्जा संकट और महंगाई देश की अर्थव्यवस्था को और कमजोर कर सकती है।

