द लोकतंत्र/ लखनऊ : Uttar Pradesh की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले आए एक बड़े सर्वे ने सियासी हलचल तेज कर दी है। दैनिक भास्कर द्वारा किए गए राज्यव्यापी सर्वे में खुलासा हुआ है कि योगी सरकार के 40 विधायक मंत्रियों में से 33 को जनता दोबारा विधायक के रूप में नहीं देखना चाहती। यह आंकड़ा सरकार के लिए चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
सर्वे के मुताबिक केवल तीन मंत्री ऐसे हैं, जिनके कामकाज से जनता संतुष्ट है और उन्हें दोबारा चुनाव मैदान में देखने की इच्छा रखती है। वहीं तीन मंत्रियों को लेकर जनता स्पष्ट राय नहीं बना सकी। सर्वे में यह भी सामने आया कि कई मंत्रियों के खिलाफ नाराजगी का मुख्य कारण उनका खराब व्यवहार, जनता से दूरी और क्षेत्रीय विकास कार्यों की कमी है।
खराब व्यवहार के कारण जिन मंत्रियों को जनता ने सबसे ज्यादा नकारा है, उनमें Surya Pratap Shahi, Somendra Tomar, Mannu Kori और Dinesh Khatik जैसे नाम शामिल हैं। योगी कैबिनेट में कुल 54 मंत्री हैं, जिनमें 14 एमएलसी हैं। बाकी 40 विधायक मंत्रियों में 12 कैबिनेट मंत्री, 8 स्वतंत्र प्रभार मंत्री और 13 राज्य मंत्रियों को जनता ने कमजोर प्रदर्शन वाला माना है।
योगी की लोकप्रियता बरकरार, लेकिन कई सीटों पर सपा की बढ़त
जहां मंत्रियों के खिलाफ नाराजगी है, वहीं Yogi Adityanath की लोकप्रियता अब भी बरकरार है। गोरखपुर शहर सीट पर सर्वे में शामिल 89 प्रतिशत लोगों ने उन्हें दोबारा विधायक बनाने का समर्थन किया है। इससे साफ है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व पर जनता का भरोसा कायम है।
सर्वे के अनुसार, जिन तीन मंत्रियों को जनता ने पसंद किया है, उनमें Nitin Agarwal, Rakesh Nishad और Satish Chandra Sharma शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि डिप्टी सीएम Brajesh Pathak समेत 9 मंत्रियों की सीटों पर जनता की पहली पसंद भाजपा नहीं बल्कि Samajwadi Party बनकर उभरी है। इनमें Anil Rajbhar, Om Prakash Rajbhar और Jaiveer Singh जैसे नाम शामिल हैं।
हालांकि पार्टी स्तर पर भाजपा अब भी मजबूत स्थिति में है। सर्वे में 29 मंत्रियों की सीटों पर भाजपा जनता की पहली पसंद बनी हुई है। यानी जनता पार्टी के साथ है, लेकिन कई मौजूदा चेहरों को बदलना चाहती है। योगी कैबिनेट की सभी 5 महिला विधायक मंत्रियों को भी जनता ने दोबारा उम्मीदवार बनाने से इनकार किया है। हालांकि इन सीटों पर भी भाजपा को बढ़त मिलती दिख रही है। यह सर्वे भाजपा के लिए चेतावनी और अवसर दोनों के रूप में देखा जा रहा है।

