द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath द्वारा सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। बकरीद से पहले आए इस बयान पर अब All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) के प्रवक्ता Waris Pathan ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होना चाहिए और किसी एक समुदाय को निशाना बनाना संविधान की भावना के खिलाफ है।
वारिस पठान ने सीएम योगी पर साधा निशाना
मीडिया से बातचीत के दौरान वारिस पठान ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संविधान की शपथ लेने के बावजूद लगातार विवादित बयान देते हैं। उन्होंने कहा, योगी जी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में पूरी तरह फेल हो चुके हैं। कभी ठोक डालूंगा वाली भाषा तो कभी कठमुल्ले जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। आखिर प्रदेश में कितनी अव्यवस्था फैलाएंगे?
उन्होंने आगे कहा कि किसी को भी धूप या बारिश में सड़क पर नमाज पढ़ने का शौक नहीं होता, लेकिन कई बार मस्जिदों में जगह की कमी के कारण लोग कुछ मिनटों के लिए बाहर नमाज पढ़ लेते हैं।
‘भजन-कीर्तन पर कभी आपत्ति नहीं उठाई’
AIMIM नेता ने कहा कि हिंदू समुदाय के लोग भी कई बार ट्रेनों, एयरपोर्ट और सार्वजनिक स्थानों पर भजन-कीर्तन और प्रार्थना करते दिखाई देते हैं, लेकिन मुस्लिम समुदाय ने कभी इस पर आपत्ति नहीं जताई।
वारिस पठान ने कहा, अगर कोई व्यक्ति कानून का पालन करते हुए और किसी की आस्था को ठेस पहुंचाए बिना पांच मिनट नमाज पढ़ लेता है, तो इससे किसे परेशानी हो रही है? संविधान सभी को बराबरी का अधिकार देता है।
‘धमकी देना मुख्यमंत्री को शोभा नहीं देता’
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी की भाषा पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। वारिस पठान ने कहा, देश संविधान और कानून से चलेगा, धमकियों से नहीं। एक मुख्यमंत्री को इस तरह की भाषा शोभा नहीं देती।
उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi से भी इस मुद्दे पर संज्ञान लेने की मांग की और पूछा कि क्या यही ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ की नीति है।
क्या कहा था सीएम योगी ने?
दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर कहा था कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, “अगर नमाज पढ़नी है तो शिफ्ट में पढ़िए या घर के अंदर पढ़िए, लेकिन सड़कें रोकने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। प्यार से मानेंगे तो ठीक, नहीं तो दूसरा तरीका अपनाएंगे।”
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दल इसे समुदाय विशेष को निशाना बनाने वाला बयान बता रहे हैं, जबकि भाजपा इसे कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बता रही है।

