द लोकतंत्र/ महाराष्ट्र : महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय नई चर्चा शुरू हो गई जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के प्रमुख Sharad Pawar ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की सार्वजनिक तौर पर तारीफ की। उन्होंने कहा कि भले ही उनकी राजनीतिक विचारधारा प्रधानमंत्री मोदी से अलग हो, लेकिन यह स्वीकार करना होगा कि प्रधानमंत्री के रूप में वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं।
मंगलवार शाम आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने कहा कि जब भी राष्ट्रहित में सामूहिक रूप से काम करने का अवसर मिले, तब सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को एक साझा उद्देश्य के साथ आगे आना चाहिए।
‘राष्ट्र के सम्मान के मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए’
शरद पवार ने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन जब बात देश की प्रतिष्ठा और सम्मान की हो, तब दलगत राजनीति को पीछे छोड़ देना चाहिए।
उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री मोदी भारत के बाहर देश की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं। हमारी राजनीतिक विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन राष्ट्र के सम्मान के सवाल पर राजनीतिक मतभेद आड़े नहीं आने चाहिए। उनके इस बयान को महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अहम माना जा रहा है।
इंदिरा गांधी और मनमोहन सिंह का भी किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान शरद पवार ने पूर्व प्रधानमंत्री Indira Gandhi, P. V. Narasimha Rao और Manmohan Singh का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने हमेशा देश के भविष्य और भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को अपने नेतृत्व के केंद्र में रखा। पवार ने कहा कि राष्ट्रीय सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देना हर सरकार और नेता की जिम्मेदारी होती है।
दरअसल, शरद पवार पुणे में आयोजित Laxmanrao Gutte Rural Development Foundation के सम्मान एवं मैत्री समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े कई पुराने कार्यकर्ता और पदाधिकारी मौजूद थे। पवार ने कहा कि कई लोग अलग-अलग दलों में चले गए हैं, लेकिन समाज और आम लोगों के साथ उनका जुड़ाव आज भी बना हुआ है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में समाज के प्रति प्रतिबद्धता सबसे महत्वपूर्ण होती है।
जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात का किस्सा सुनाया
अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन को याद करते हुए शरद पवार ने बताया कि वह 1958 में बारामती से पुणे आए थे क्योंकि उस समय उनके गृह नगर में कॉलेज नहीं था। उन्होंने कहा कि युवा आंदोलन से जुड़ने के बाद उन्हें राष्ट्रीय नेताओं के करीब से काम करने का अवसर मिला।
पवार ने भारत के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru से मुलाकात का एक दिलचस्प किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह दिल्ली के तीन मूर्ति भवन पहुंचे थे, तब नेहरू के प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण वह अपने सवाल तक भूल गए थे।
इंदिरा गांधी के सम्मान से जुड़ा प्रसंग भी सुनाया
शरद पवार ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ा एक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि सोवियत संघ की यात्रा के दौरान इंदिरा गांधी ने भारतीय प्रधानमंत्री के सम्मान से किसी तरह का समझौता स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। पवार ने कहा कि इंदिरा गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि वह करोड़ों भारतीयों का प्रतिनिधित्व करती हैं और भारत की प्रतिष्ठा के साथ किसी भी तरह की अनदेखी स्वीकार नहीं करेंगी।
राष्ट्रीय हित में साथ आने की अपील
अपने संबोधन के अंत में शरद पवार ने विभिन्न दलों में काम कर रहे पुराने सहयोगियों से अपील की कि यदि राष्ट्रहित में साथ काम करने का अवसर मिले, तो सभी को एकजुट होकर देश की प्रतिष्ठा बढ़ाने में योगदान देना चाहिए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शरद पवार का यह बयान ऐसे समय आया है जब राष्ट्रीय राजनीति में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बयानबाजी जारी है। ऐसे में उनका यह संतुलित रुख राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

