द लोकतंत्र/ कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए चुनौतियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। इसी बीच पार्टी को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। राज्यसभा सांसद और तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सुष्मिता देव ने अपनी राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ-साथ पार्टी भी छोड़ दी है। सुष्मिता देव को लंबे समय से ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है, ऐसे में उनका इस्तीफा राज्य और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में चर्चा का विषय बन गया है।
राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को तृणमूल कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण झटका माना जा रहा है। इस्तीफे के बाद यह भी चर्चा तेज हो गई है कि सुष्मिता देव जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकती हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात की है। इसके बाद उनके भाजपा में शामिल होने और असम से राज्यसभा भेजे जाने की संभावनाओं को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।
कांग्रेस से TMC तक का राजनीतिक सफर
सुष्मिता देव का राजनीतिक जीवन लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़ा रहा है। असम के सिलचर से संबंध रखने वाली सुष्मिता देव वर्ष 2014 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंची थीं। उन्हें कांग्रेस नेतृत्व ने महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंपी थी। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता संतोष मोहन देव की पुत्री हैं, जिसके कारण उनका राजनीतिक प्रभाव भी काफी व्यापक माना जाता रहा है।
वर्ष 2021 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था। पार्टी में शामिल होने के कुछ ही समय बाद ममता बनर्जी ने उन्हें राज्यसभा भेजा। संसद में वह कई महत्वपूर्ण समितियों की सदस्य रहीं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर मुखरता से अपनी बात रखती थीं। उनके इस्तीफे को तृणमूल कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक नुकसान के रूप में देखा जा रहा है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ रही TMC की चुनौतियां
पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष और राजनीतिक उठापटक की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी के कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों के अलग रुख अपनाने की चर्चाएं भी राजनीतिक माहौल को गर्माए हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पार्टी पहले से ही विभिन्न राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। विपक्षी दल इस घटनाक्रम को TMC की कमजोर होती राजनीतिक स्थिति के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि पार्टी की ओर से फिलहाल इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सुष्मिता देव की अगली राजनीतिक पारी किस दिशा में जाती है। यदि वह भाजपा में शामिल होती हैं, तो यह पूर्वोत्तर भारत और पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है। फिलहाल उनका इस्तीफा राज्य की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है और सभी की नजर उनके अगले कदम पर टिकी हुई है।



