द लोकतंत्र/ राजस्थान : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एआईसीसी महासचिव Sachin Pilot बुधवार को राजस्थान के करौली जिले के हिंडौन सिटी पहुंचे, जहां उन्होंने अपने पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय राजेश पायलट की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। प्रतिमा अनावरण के बाद आयोजित किसान सभा में सचिन पायलट ने किसानों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों को संबोधित करते हुए राजनीति, जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर विस्तार से अपनी बात रखी। इस दौरान उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर मनभेद नहीं होना चाहिए।
सचिन पायलट ने अपने संबोधन में कहा कि राजनीति केवल पद और पुरस्कार हासिल करने का माध्यम नहीं होनी चाहिए। जो लोग सिर्फ सत्ता या पद की लालसा में राजनीति करते हैं, उन्हें कभी संतुष्टि नहीं मिल सकती। उन्होंने कहा कि कुछ नेता राजनीति में पहले से ही अपने लिए पदों की ‘एडवांस बुकिंग’ चाहते हैं, जबकि वास्तविक राजनीति जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझने और समाधान निकालने का माध्यम है।
Sachin Pilot का ‘मोहब्बत की दुकान’ की राजनीति में विश्वास, सम्मान को बताया सबसे बड़ा मूल्य
कांग्रेस नेता ने राहुल गांधी के ‘मोहब्बत की दुकान’ वाले संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि वह इसी विचारधारा में विश्वास रखते हैं। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक जीवन में जिन नेताओं के साथ उन्होंने काम किया है, उनका हमेशा सम्मान किया है। वैचारिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन व्यक्तिगत रिश्तों में कटुता नहीं आनी चाहिए।
पायलट ने कहा कि समय बदल सकता है, राजनीतिक परिस्थितियां बदल सकती हैं, लेकिन राजनीति में नैतिकता, शालीनता और मर्यादा का महत्व कभी कम नहीं होता। जनता उन्हीं नेताओं को लंबे समय तक याद रखती है जो ईमानदारी और सच्चाई के साथ लोगों के बीच काम करते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि जनता से जुड़ाव ही किसी राजनीतिक दल और नेता की सबसे बड़ी ताकत होती है।
उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कुछ नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीति में एक-दूसरे का सम्मान करना बेहद जरूरी है। लोकतंत्र में विरोध होना चाहिए, लेकिन विरोध के नाम पर मर्यादा नहीं टूटनी चाहिए।
Sachin Pilot ने राजस्थान और केंद्र सरकार पर साधे सवाल, किसानों और युवाओं के मुद्दे उठाए
किसान सभा को संबोधित करते हुए सचिन पायलट ने राजस्थान की भाजपा सरकार पर कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पायलट ने कहा कि सरकार विकास और रोजगार जैसे मुद्दों से ध्यान हटाकर केवल धार्मिक राजनीति पर केंद्रित है।
उन्होंने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विकास में बढ़ती असमानता का भी जिक्र किया। मनरेगा योजना का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि रोजगार गारंटी योजना का प्रभाव लगातार कमजोर पड़ रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को पर्याप्त काम नहीं मिल रहा। किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि खाद, बीज और कृषि से जुड़ी अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जबकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए पायलट ने कहा कि लोकसभा चुनावों के दौरान किए गए कई वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी संस्थानों का निजीकरण बढ़ रहा है और युवाओं के सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसके साथ ही उन्होंने आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि सामाजिक न्याय की व्यवस्था को कमजोर नहीं होने दिया जाना चाहिए।
अपने संबोधन के अंत में सचिन पायलट ने NEET पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की। साथ ही उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने और जनता के मुद्दों को लेकर सक्रिय रहने का आह्वान किया।



