द लोकतंत्र/नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाताओं के नाम काटे जाने के मुद्दे पर Supreme Court ने गुरुवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की याचिका पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को नोटिस जारी किया है। इस याचिका में SIR प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। अदालत ने मामले को पहले से लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ने का निर्देश भी दिया है। हालांकि, नोटिस जारी होने का मतलब याचिका में लगाए गए आरोपों को स्वीकार करना या SIR प्रक्रिया पर रोक लगाना नहीं है।
राहुल गांधी, खरगे और अखिलेश यादव समेत कई नेता याचिका में शामिल
विपक्षी नेताओं की ओर से दायर याचिका में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया और इसके दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई है। याचिका में राहुल गांधी के अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव भी शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले, शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी. राजा और अन्य नेताओं ने भी इस मामले में Supreme Court का रुख किया है। विपक्षी नेताओं की मांग है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया और मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े मुद्दों की न्यायिक समीक्षा की जाए।
Supreme Court ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया। अदालत ने कहा कि इस मामले को पहले से लंबित संबंधित मामलों के साथ टैग किया जाएगा। सुनवाई के दौरान पीठ ने निर्वाचन आयोग के प्रतिनिधि को नोटिस स्वीकार करने के लिए कहा। Supreme Court की इस कार्रवाई के बाद अब आयोग को याचिका में उठाए गए मुद्दों पर अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
एक याचिकाकर्ता के आचरण पर भी अदालत की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान Supreme Court ने एक याचिकाकर्ता के आचरण को लेकर भी टिप्पणी की। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई पर एक याचिकाकर्ता से उसके आचरण के बारे में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। हालांकि, पीठ ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किस याचिकाकर्ता से सवाल किया जाएगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नोटिस जारी करने का अर्थ किसी पक्ष के पक्ष या विपक्ष में निष्कर्ष देना नहीं है। पीठ के मुताबिक, एक याचिकाकर्ता के संबंध में नोटिस फिलहाल अस्थायी रूप से स्वीकार किया जाएगा, बशर्ते वह अपने आचरण के बारे में स्पष्टीकरण दे।
SIR विवाद पर Supreme Court की सुनवाई अहम
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष और निर्वाचन आयोग के बीच विवाद लगातार चर्चा में है। विपक्षी दलों ने प्रक्रिया और मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए हैं, जबकि इस मामले में आयोग का पक्ष सुनना न्यायिक प्रक्रिया का अगला अहम चरण होगा। फिलहाल, Supreme Court ने याचिका पर नोटिस जारी किया है। अब मामले की आगे की सुनवाई में आयोग का जवाब और याचिकाकर्ता के आचरण पर अदालत की टिप्पणी महत्वपूर्ण होगी।
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