द लोकतंत्र/ नई दिल्ली डेस्क : गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर देशभर में जनजागरण अभियान चला रहे ज्योतिष पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती रविवार को उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बड़ौत पहुंचे। यहां उन्होंने गौ संरक्षण, सनातन परंपरा और Ram Mandir ट्रस्ट से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार रखे। इस दौरान उनके कई बयान चर्चा का विषय बन गए।
बड़ौत के कोताना रोड स्थित सर्व समाज उत्थान समिति के कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि गौमाता केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला भी हैं। उन्होंने कहा कि देश में गौ संरक्षण को लेकर व्यापक जनजागरण की आवश्यकता है।
शंकराचार्य ने बताया कि वह गौमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अब तक करीब 200 विधानसभा क्षेत्रों में जाकर लोगों से संवाद किया जा चुका है और इस अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिल रहा है।
Ram Mandir पर खुलकर बोले, गौ संरक्षण के मुद्दे पर जनता से समर्थन की अपील
अपने संबोधन में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने लोगों से गौ रक्षा के मुद्दे को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज को यह समझना होगा कि गौ संरक्षण केवल धार्मिक विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है ताकि गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए समाज और सरकार दोनों स्तर पर प्रभावी कदम उठाए जा सकें। उन्होंने लोगों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भी इस मुद्दे को प्रमुखता देने का आग्रह किया।
शंकराचार्य ने कहा कि भारत की परंपरा में गौमाता को विशेष स्थान प्राप्त है और यह विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका अभियान किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं बल्कि सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने के लिए चलाया जा रहा है।
Ram Mandir ट्रस्ट और सनातन परंपरा पर भी रखी राय
कार्यक्रम के दौरान जब उनसे Ram Mandir ट्रस्ट और मंदिर प्रबंधन से जुड़े विवादों पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े धार्मिक या सांस्कृतिक प्रकल्प में पारदर्शिता और विशेषज्ञता बेहद आवश्यक होती है। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक संस्थानों के संचालन में अनुभवी और योग्य लोगों की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है।
सनातन परंपरा और राजनीतिक हिंदुत्व को लेकर पूछे गए सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि दोनों विषयों को अलग-अलग दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता है। उनके अनुसार सनातन धर्म का मूल उद्देश्य मानवता, सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण है।
उन्होंने कहा कि उनका जनजागरण अभियान किसी विवाद को जन्म देने के लिए नहीं बल्कि समाज को उसकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और भारतीय परंपराओं के प्रति जागरूक करने के लिए चलाया जा रहा है। बागपत में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। गौ संरक्षण और भारतीय संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर शंकराचार्य के विचारों को लोगों ने गंभीरता से सुना और अभियान के प्रति समर्थन भी व्यक्त किया।



