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Mahashivratri 2026: 15 फरवरी को है महाशिवरात्रि; शिव पूजा में भूलकर भी न करें इन 5 चीजों का इस्तेमाल, रूठ सकते हैं महादेव

The loktnatra

द लोकतंत्र : हर साल की तरह इस बार भी फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का महापर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। यह दिन केवल व्रत रखने का नहीं, बल्कि महादेव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और मिलन का उत्सव है। साल 2026 में यह पावन तिथि 15 फरवरी को पड़ रही है।

ज्योतिष शास्त्र की मानें तो इस बार की महाशिवरात्रि बेहद खास है क्योंकि इस दिन कई दुर्लभ और शक्तिशाली योग बन रहे हैं। ऐसे में भगवान शिव की कृपा पाने के लिए भक्त जलाभिषेक और रुद्राभिषेक की तैयारी कर रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महादेव की पूजा के कुछ कड़े नियम भी हैं? शिवपुराण के अनुसार, कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें शिवलिंग पर चढ़ाना सख्त मना है।

भूलकर भी न करें इन चीजों का इस्तेमाल

1. शंख से जल अर्पित करना

ज्यादातर देवी-देवताओं की पूजा में शंख बजाना शुभ माना जाता है, लेकिन महादेव की पूजा में शंख वर्जित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था, जिसकी उत्पत्ति शंख से मानी जाती है। इसलिए न तो शिव पूजा में शंख बजाया जाता है और न ही इससे जलाभिषेक किया जाता है।

2. सिंदूर, हल्दी और कुमकुम

महादेव को ‘वैरागी’ और ‘अघोरी’ माना जाता है, जो भस्म रमाते हैं। हल्दी, कुमकुम और सिंदूर स्त्री सौंदर्य और सौभाग्य के प्रतीक हैं, इसलिए इन्हें शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाता। हाँ, आप माता पार्वती की मूर्ति पर इन चीजों का उपयोग जरूर कर सकते हैं।

3. कटा-फटा बेलपत्र

बेलपत्र महादेव को अत्यंत प्रिय है, लेकिन चढ़ाने से पहले उसे ध्यान से जरूर देखें। बेलपत्र हमेशा तीन पत्तों वाला और अखंडित (बिना कटा-फटा) होना चाहिए। खंडित बेलपत्र चढ़ाना शुभ नहीं माना जाता और इससे पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता।

4. केतकी और तुलसी के पत्ते

शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते और केतकी के फूल चढ़ाना वर्जित है। शास्त्रों के अनुसार, केतकी ने ब्रह्मा जी के एक झूठ में साथ दिया था, जिससे क्रोधित होकर शिव जी ने उन्हें अपनी पूजा से बाहर कर दिया था। इसकी जगह आप धतूरा, भांग और शमी के पत्ते चढ़ा सकते हैं।

5. टूटे हुए चावल (खंडित अक्षत)

पूजा में चावल यानी अक्षत का बहुत महत्व है। अक्षत का अर्थ ही होता है ‘जो टूटा न हो’। महादेव को हमेशा साफ और साबुत चावल ही चढ़ाएं। खंडित चावल चढ़ाने से पूजा अधूरी मानी जाती है।

क्यों है इस बार की शिवरात्रि विशेष?

पंचांग के अनुसार, इस साल ग्रहों की स्थिति ऐसी बन रही है कि महाशिवरात्रि पर की गई पूजा का फल कई गुना बढ़कर मिलेगा। विशेषकर वैवाहिक जीवन की समस्याओं को दूर करने और मनचाहा वर पाने के लिए यह दिन बहुत उत्तम है।

महादेव बहुत भोले हैं, वे आपकी भावना देखते हैं, लेकिन शास्त्रों की मर्यादा का पालन करना भी भक्त का कर्तव्य है। 15 फरवरी को इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप भगवान शिव और माता पार्वती का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

Uma Pathak

Uma Pathak

About Author

उमा पाठक ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में स्नातक और बीएचयू से हिन्दी पत्रकारिता में परास्नातक किया है। पाँच वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाली उमा ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी हैं। उमा पत्रकारिता में गहराई और निष्पक्षता के लिए जानी जाती हैं।

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