द लोकतंत्र/ लखनऊ : बिहार में हालिया सियासी बदलाव के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद राज्य की सत्ता अब भारतीय जनता पार्टी के हाथों में जाती दिख रही है। बीजेपी नेता सम्राट चौधरी बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के प्रमुख Akhilesh Yadav ने बिना नाम लिए भाजपा पर शायराना अंदाज में तंज कसकर राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘वो साथी नहीं शातिर है जो आपको छोटा बना दे, जिसके हक़दार हैं उससे नीचे की शपथ दिला दे।’ उनके इस बयान को बिहार के बदलते सत्ता समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे भाजपा और उसके सहयोगियों पर कटाक्ष मान रहे हैं।
पहली बार बिहार में बीजेपी का मुख्यमंत्री
बिहार की राजनीति में यह एक ऐतिहासिक पल माना जा रहा है, क्योंकि पहली बार राज्य में भाजपा का मुख्यमंत्री बनने जा रहा है। सम्राट चौधरी को पहले भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया और बाद में एनडीए विधानमंडल दल की बैठक में भी उनके नाम पर मुहर लगी। इसके बाद उनका मुख्यमंत्री बनना लगभग तय हो गया। यह बदलाव राज्य की राजनीति में नई दिशा और नए समीकरणों की ओर इशारा करता है।
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर
सम्राट चौधरी का राजनीतिक करियर काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत आरजेडी शासनकाल में मंत्री के रूप में की थी और लंबे समय तक पार्टी से जुड़े रहे। बाद में वे जेडीयू में शामिल हुए और कुछ समय तक नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम किया। वर्ष 2017 में उन्होंने भाजपा का दामन थामा, जिसके बाद उनकी राजनीतिक स्थिति मजबूत होती गई।
बीजेपी में उन्हें कोइरी (कुशवाहा) समुदाय के प्रभावशाली नेता के रूप में पहचान मिली। उन्हें पार्टी का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया, विधान परिषद का सदस्य बनाया गया और बाद में राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी दी गई। मार्च 2023 में उन्हें बिहार बीजेपी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जिससे संगठन में उनकी पकड़ और मजबूत हुई।
सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी भी एक बड़े राजनीतिक चेहरा रहे हैं, जिन्होंने कांग्रेस, आरजेडी और जेडीयू जैसी पार्टियों के साथ काम किया। ऐसे में सम्राट चौधरी की राजनीतिक विरासत भी मजबूत रही है।

