द लोकतंत्र/ कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों घटनाक्रम तेजी से बदल रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए चुनौतियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। इसी क्रम में मंगलवार को कोलकाता स्थित कालीघाट कार्यालय पर अपराध जांच विभाग (CID) की टीम पहुंची। रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच एजेंसी की टीम तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को नोटिस देने पहुंची थी। मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों के प्रस्ताव में कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित अनियमितताओं और असंगतियों की जांच से जुड़ा बताया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं और इसी सिलसिले में अभिषेक बनर्जी से पूछताछ की आवश्यकता महसूस की गई है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है, क्योंकि हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं के खिलाफ विभिन्न मामलों में कार्रवाई होती रही है।
TMC नेता अभिषेक बनर्जी को तीसरी बार भेजा गया नोटिस
जानकारी के मुताबिक, CID ने अभिषेक बनर्जी को तीसरा नोटिस जारी करते हुए 9 जून की शाम 5 बजे तक दक्षिण कोलकाता स्थित मुख्यालय में उपस्थित होकर पूछताछ में शामिल होने को कहा था। इससे पहले जारी नोटिसों में भी उन्हें जांच में सहयोग करने के लिए बुलाया गया था।
हालांकि अभिषेक बनर्जी ने स्वास्थ्य कारणों और पूर्व में हुई एक कथित हमले की घटना का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय की मांग की थी। बताया जा रहा है कि उन्होंने जांच एजेंसी को पत्र लिखकर अपनी स्थिति से अवगत कराया और पूछताछ के लिए नई तारीख देने का अनुरोध किया। इसके बाद भी CID ने दोबारा नोटिस जारी कर उन्हें उपस्थित होने को कहा। अब यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
सब्यसाची दत्ता की गिरफ्तारी से बढ़ी TMC की परेशानी
इसी बीच तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक सब्यसाची दत्ता की गिरफ्तारी ने राज्य की राजनीति को और गरमा दिया है। उन्हें कथित जबरन वसूली और आपराधिक धमकी के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। अदालत ने उन्हें आठ दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2018 में उनसे एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम की मांग की गई थी।
दत्ता की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं पर विभिन्न मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है। हाल ही में राज्य सरकार में मंत्री रह चुके एक अन्य नेता की गिरफ्तारी ने भी राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे इन मामलों से पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष इन घटनाओं को सत्तारूढ़ दल के लिए बड़ा झटका बता रहा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और पार्टी न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करती है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं राज्य की राजनीति को और प्रभावित कर सकती हैं।

