द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता सामने आई है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित शांति समझौते के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हो गए हैं। इसकी जानकारी वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने मीडिया को दी। अधिकारियों के अनुसार, US-Iran Deal पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कलिबाफ ने हस्ताक्षर किए हैं।
इस घटनाक्रम को पश्चिम एशिया में स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। समझौते के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि दोनों देशों के बीच संबंधों में नया अध्याय शुरू हो सकता है और इससे क्षेत्र में शांति तथा आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
US-Iran Deal पर हॉर्मुज खुलने लगा, तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत की उम्मीद
समझौते के बाद जारी बयान में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) अब आंशिक रूप से खुल चुका है और जहाजों की आवाजाही शुरू हो गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शुक्रवार तक यह मार्ग पूरी तरह सामान्य हो जाएगा। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत के दौरान सकारात्मक माहौल बना और अंततः दोनों पक्ष एक समझौते पर पहुंचने में सफल रहे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हालिया तनाव के दौरान सैन्य कार्रवाई की गई थी, लेकिन व्यापक संघर्ष की संभावना बनने से पहले ही कूटनीतिक समाधान निकल आया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि इस समझौते का सबसे बड़ा प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा। उनके अनुसार तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आ रही है और शेयर बाजारों में भी सकारात्मक संकेत देखने को मिल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल जाता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति में सुधार होगा, जिसका फायदा भारत समेत कई ऊर्जा आयातक देशों को मिल सकता है।
US-Iran Deal के अनुसार ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बनी सहमति, रूस-यूक्रेन वार्ता पर भी नजर
डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि ईरान ने परमाणु हथियार नहीं रखने और न विकसित करने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल अमेरिका और ईरान के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच संबंध भविष्य में बेहतर बने रहेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि समझौते की शर्तों का पालन नहीं हुआ तो हालात फिर पहले जैसे हो सकते हैं, लेकिन उन्हें इसकी संभावना कम लगती है।
इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और समझौते को सफल बनाने में फ्रांस की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। इसके अलावा ट्रंप ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि हाल ही में उनकी बातचीत Volodymyr Zelenskyy और Vladimir Putin से हुई है। उनके अनुसार दोनों पक्ष बातचीत के लिए तैयार दिखाई दे रहे हैं और अब अमेरिका इस दिशा में भी सक्रिय प्रयास करेगा।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौते की सफलता न केवल मध्य पूर्व में तनाव कम कर सकती है, बल्कि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। आने वाले 60 दिन इस समझौते के क्रियान्वयन और इसके दीर्घकालिक प्रभावों को तय करने में निर्णायक माने जा रहे हैं।




