द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : संसद के मानसून सत्र के दौरान लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के बीच राजनीतिक माहौल उस समय और गरमा गया, जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सुरक्षा व्यवस्था और उनके काफिले को लेकर टिप्पणी की। राहुल गांधी ने सदन में दावा किया कि उन्होंने गृह मंत्री Amit Shah का ’30 गाड़ियों का काफिला’ देखा है। इसके साथ ही उन्होंने छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के लिए भी गृह मंत्री की जवाबदेही का मुद्दा उठाया।
राहुल गांधी के इस बयान के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने कड़ा विरोध जताया और उनके आरोपों को निराधार बताते हुए सदन में आपत्ति दर्ज कराई। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सदन की कार्यवाही के दौरान संसदीय भाषा और मर्यादा बनाए रखने की सलाह दी। राहुल गांधी के बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह सवाल फिर चर्चा में आ गया कि आखिर केंद्रीय गृह मंत्री के काफिले में वास्तव में कितनी गाड़ियां होती हैं और हाल के वर्षों में इसमें क्या बदलाव किए गए हैं।
गृह मंत्री Amit Shah के काफिले में कितनी गाड़ियां होती हैं?
उपलब्ध आधिकारिक और सार्वजनिक जानकारी के अनुसार, हाल के वर्षों में वीआईपी काफिलों के आकार को सीमित करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। सरकार का उद्देश्य ईंधन की बचत, यातायात पर दबाव कम करना और अनावश्यक खर्चों में कमी लाना बताया गया है।
इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के काफिले में भी पहले की तुलना में गाड़ियों की संख्या कम की गई है। पहले जहां सुरक्षा काफिले में लगभग 10 से 11 वाहन शामिल होने की बात कही जाती थी, वहीं अब सामान्य परिस्थितियों में गृह मंत्री के साथ सीमित संख्या में सुरक्षा वाहन चलते हैं। इनमें बख्तरबंद आधिकारिक वाहन, पायलट कार, सुरक्षा बलों की एस्कॉर्ट गाड़ियां और आवश्यक बैकअप वाहन शामिल रहते हैं। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां यह भी स्पष्ट करती रही हैं कि काफिले का आकार कम करने का मतलब सुरक्षा मानकों में कोई कमी नहीं है। गृह मंत्री की सुरक्षा Z+ श्रेणी के प्रोटोकॉल के अनुसार की जाती है और आवश्यकता के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव भी किए जा सकते हैं।
पीएम मोदी के काफिले में भी हुआ है बदलाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा व्यवस्था स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) के तय प्रोटोकॉल के तहत संचालित होती है। प्रधानमंत्री के काफिले की संरचना उनकी यात्रा, स्थान और सुरक्षा आकलन के आधार पर तय की जाती है। सामान्य परिस्थितियों में प्रधानमंत्री के काफिले में सुरक्षा वाहनों, पायलट कारों, विशेष इंटरवेंशन यूनिट, संचार वाहनों, एंबुलेंस और अन्य आवश्यक सुरक्षा संसाधनों को शामिल किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में प्रधानमंत्री के काफिले के आकार को भी पहले की तुलना में सीमित किए जाने की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आई है, हालांकि अंतिम संख्या सुरक्षा एजेंसियों की आवश्यकता और यात्रा की प्रकृति के अनुसार बदल सकती है।
गौरतलब है कि संसद में राहुल गांधी द्वारा किए गए “30 गाड़ियों वाले काफिले” संबंधी दावे पर सरकार की ओर से अलग-अलग नेताओं ने आपत्ति जताई है और इसे तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है। वहीं राहुल गांधी अपने बयान पर कायम हैं।
ऐसे में यह विवाद अब केवल सुरक्षा काफिले तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि संसद में हुई बहस, छात्र आंदोलन और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा बन चुका है। आने वाले दिनों में यदि इस मुद्दे पर सरकार या संबंधित सुरक्षा एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण आता है, तो इस बहस की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।



