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एंटी पेपर लीक बिल पर CJP के सवाल, बोले- सजा बढ़ाना काफी नहीं, पेपर लीक रोकने का सिस्टम भी मजबूत होना चाहिए

CJP questions Anti-Paper Leak Bill; states that merely increasing penalties is not enough—the system to prevent paper leaks must also be strengthened.

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : लोकसभा से एंटी पेपर लीक बिल 2026 पारित होने के बाद इस पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने विधेयक का स्वागत करने के साथ-साथ इसके कई प्रावधानों पर सवाल भी उठाए। उनका कहना है कि सरकार ने पेपर लीक होने के बाद सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान तो किया है, लेकिन सबसे अहम सवाल पेपर लीक को होने से कैसे रोका जाएगा उसका पर्याप्त जवाब इस कानून में दिखाई नहीं देता।

जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान रांका ने कहा कि बिल का अध्ययन करने के बाद उनकी पहली प्रतिक्रिया यही रही कि इसका अधिकतर फोकस दंडात्मक कार्रवाई पर है। उन्होंने कहा कि अपराध होने के बाद सजा तय करना आवश्यक है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाएं हों ही नहीं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता लाना चाहती है, तो केवल सजा का प्रावधान पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए परीक्षा प्रक्रिया, तकनीकी सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है।

‘रोकथाम के उपायों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत’, CJP ने गिनाईं कई मांगें

आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार को परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों और निजी वेंडर्स की जवाबदेही तय करने पर भी स्पष्ट प्रावधान लाने चाहिए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पेपर लीक में शामिल पाए जाने वाले वेंडर्स को ब्लैकलिस्ट करने, परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और अधिक सुरक्षित बनाने या साइबर सुरक्षा को मजबूत करने जैसे कदमों पर पर्याप्त विचार किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा केंद्रों की निगरानी, दस्तावेजों की एंड-टू-एंड ट्रैकिंग, सुरक्षा मानकों और तकनीकी निगरानी जैसे विषयों पर विधेयक में अधिक स्पष्टता होनी चाहिए थी। उनके अनुसार, यदि इन बिंदुओं पर ठोस व्यवस्था नहीं बनाई जाती, तो केवल सजा बढ़ाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा।

रांका ने सरकार की रणनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था ऐसी प्रतीत होती है, जिसमें ‘घटना के बाद उपचार’ पर ज्यादा जोर है, जबकि “घटना को रोकने” की दिशा में अपेक्षित प्रयास नजर नहीं आते। उन्होंने कहा कि CJP शुरुआत से ही यह मांग करता रहा है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर दंड के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार भी किए जाएं।

राहुल गांधी के बयान पर भी प्रतिक्रिया, CJP ने पैलेट गन मामले में सरकार से मांगा जवाब

छात्र आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और राहुल गांधी के हालिया बयान पर भी आशुतोष रांका ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन के दौरान वास्तव में पैलेट गन का इस्तेमाल हुआ है, तो सरकार को इस विषय पर स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब देना चाहिए। रांका का दावा है कि उन्होंने जिन मीडिया रिपोर्टों का अध्ययन किया है, उनमें कथित रूप से ऐसे रिकॉर्ड का उल्लेख किया गया है, जिनमें पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति दर्ज होने की बात कही गई है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि यदि इस तरह के उपकरणों का इस्तेमाल किया गया, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इसकी अनुमति किस स्तर पर दी गई और किन परिस्थितियों में ऐसा निर्णय लिया गया। उनके अनुसार, केवल सामान्य बयान देकर इस विवाद को समाप्त नहीं किया जा सकता।

लोकसभा से विधेयक पारित होने के बाद अब इसकी प्रभावशीलता और क्रियान्वयन को लेकर बहस तेज होती दिख रही है। एक ओर सरकार का कहना है कि नया कानून परीक्षा माफिया पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेगा, वहीं विपक्ष और कुछ संगठनों का तर्क है कि दंड के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए भी व्यापक सुधार आवश्यक हैं। आने वाले समय में इस कानून के लागू होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यह पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कितना प्रभावी साबित होता है।

यह भी पढ़ें – Journalist Intellectual Property: पत्रकार की कलम से बनते हैं मीडिया संस्थान, ख़बरनवीसों की सबसे बड़ी लड़ाई सिर्फ़ वेतन की नहीं ‘स्वामित्व’ की होनी चाहिए

Team The Loktantra

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