द लोकतंत्र/बिजनेस न्यूज़: भारत ने Anti-dumping नियमों के तहत चीन से आयात होने वाले पांच उत्पादों की जांच शुरू की है। इनमें रसायन, दवा निर्माण से जुड़ा कच्चा माल और इंजीनियरिंग क्षेत्र के उत्पाद शामिल हैं। यह कार्रवाई घरेलू निर्माताओं की अलग-अलग शिकायतों के बाद शुरू की गई है। वाणिज्य मंत्रालय के अधीन काम करने वाले Directorate General of Trade Remedies (DGTR) ने इन मामलों में जांच शुरू की है। घरेलू कंपनियों ने आरोप लगाया है कि इन उत्पादों के कम कीमत पर आयात से उनके कारोबार और प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ रहा है।
किन पांच चीनी उत्पादों की हो रही जांच?
DGTR की ओर से जारी अलग-अलग अधिसूचनाओं के अनुसार, जिन पांच उत्पादों की जांच शुरू की गई है, उनमें Persulphates, Clavulanic Acid, Certain Counterbalance Forklifts, Internally Grooved Copper Tubes and Pipes और Caprolactam शामिल हैं। इन उत्पादों का इस्तेमाल अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है।
Persulphates का उपयोग मुख्य रूप से कपड़ा उद्योग में किया जाता है। Clavulanic Acid दवा उद्योग में इस्तेमाल होने वाला एक महत्वपूर्ण सक्रिय फार्मास्युटिकल घटक है। Counterbalance Forklifts का इस्तेमाल सामान को उठाने और औद्योगिक स्थानों पर सामग्री को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में किया जाता है। वहीं Internally Grooved Copper Tubes and Pipes और Caprolactam का इस्तेमाल औद्योगिक एवं विनिर्माण गतिविधियों में होता है।
घरेलू कंपनियों ने क्यों की शिकायत?
इन मामलों में भारत के घरेलू निर्माताओं ने अलग-अलग आवेदन दाखिल किए हैं। उनका आरोप है कि चीन से इन उत्पादों का आयात ऐसे दामों पर किया जा रहा है, जिससे भारतीय उत्पादकों के कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। कंपनियों ने सरकार से इन आयातों पर Anti-dumping Duty लगाने की मांग की है।
DGTR ने उपलब्ध प्रारंभिक साक्ष्यों और घरेलू उद्योग की ओर से दिए गए आवेदन की जांच के बाद संबंधित मामलों में जांच शुरू की है। हालांकि, जांच शुरू होने का मतलब यह नहीं है कि चीन से आने वाले इन सभी उत्पादों पर डंपिंग साबित हो गई है। जांच के दौरान आयात की कीमत, घरेलू उद्योग पर प्रभाव और अन्य संबंधित पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा।
डंपिंग साबित होने पर क्या होगा?
यदि जांच में यह स्थापित होता है कि संबंधित उत्पादों को भारत में अनुचित रूप से कम कीमत पर बेचा गया और इससे घरेलू उद्योग को material injury यानी महत्वपूर्ण नुकसान हुआ, तो DGTR इन उत्पादों पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश कर सकता है। इसके बाद ड्यूटी लगाने का अंतिम निर्णय वित्त मंत्रालय की ओर से लिया जाता है।
एंटी-डंपिंग जांच का उद्देश्य विदेशी उत्पादों को रोकना नहीं, बल्कि यह पता लगाना है कि कहीं कम कीमत वाले आयात से घरेलू निर्माताओं को अनुचित नुकसान तो नहीं हो रहा। भारत WTO का सदस्य है और WTO के नियमों के तहत निर्धारित परिस्थितियों में एंटी-डंपिंग उपाय किए जा सकते हैं।
चीन से आयात को लेकर भारत पहले भी कई उत्पादों पर ऐसी कार्रवाई कर चुका है। ताजा जांच ऐसे समय में शुरू हुई है जब चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा काफी बढ़ा हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में चीन को भारत का निर्यात 36.66 प्रतिशत बढ़कर 19.47 अरब डॉलर हुआ, जबकि चीन से आयात 16 प्रतिशत बढ़कर 131.63 अरब डॉलर पहुंच गया। इस दौरान भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर रिकॉर्ड 112.6 अरब डॉलर हो गया, जो 2024-25 में 99.2 अरब डॉलर था।
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