द लोकतंत्र/बिजनेस न्यूज़: भारत में Battery Energy Storage System (BESS) की क्षमता तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। CRISIL Ratings के अनुसार, अगले दो वित्त वर्षों में देश में बैटरी आधारित ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़कर करीब 45-50 GWh तक पहुंच सकती है। ऊर्जा भंडारण की बढ़ती जरूरत को देखते हुए BESS को भारत के बिजली क्षेत्र में अहम भूमिका निभाने वाली तकनीक माना जा रहा है। खासकर सौर और पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय बिजली की उपलब्धता को संतुलित करने में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है।
नवीकरणीय ऊर्जा के साथ बढ़ रही स्टोरेज की जरूरत
भारत में सौर और पवन ऊर्जा की क्षमता लगातार बढ़ रही है। हालांकि, इन स्रोतों से हर समय एक समान बिजली नहीं मिलती। सौर ऊर्जा दिन में उपलब्ध होती है, जबकि बिजली की मांग कई बार शाम और रात के समय अधिक रहती है। ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणाली अतिरिक्त बिजली को स्टोर करके जरूरत के समय उपलब्ध कराने में मदद करती है।
BESS में बिजली को बैटरियों में जमा किया जाता है और मांग बढ़ने पर इसे ग्रिड में वापस भेजा जा सकता है। इससे बिजली की आपूर्ति को अधिक लचीला बनाने और नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल में मदद मिलती है। CRISIL के पुराने अनुमानों में भी भारत में बैटरी ऊर्जा भंडारण के तेजी से विस्तार की संभावना जताई गई है।
45-50 GWh क्षमता बढ़ने का अनुमान
CRISIL Ratings के अनुमान के अनुसार, अगले दो वित्त वर्षों में BESS क्षमता में बड़ी वृद्धि हो सकती है। यह विस्तार देश में बढ़ती बिजली मांग, नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और ऊर्जा भंडारण से जुड़ी परियोजनाओं के कारण होने की उम्मीद है।
सरकार और बिजली क्षेत्र की संस्थाएं भी ऊर्जा भंडारण को भविष्य की बिजली व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही हैं। राष्ट्रीय विद्युत योजना के अनुसार, 2031-32 तक भारत में BESS की जरूरत 47.24 GW/236.22 GWh तक पहुंचने का अनुमान है। इसके अलावा, पंप्ड स्टोरेज को शामिल करने पर कुल ऊर्जा भंडारण की जरूरत इससे भी अधिक होगी।
बिजली व्यवस्था को मिलेगी अधिक मजबूती
ऊर्जा भंडारण बढ़ने से बिजली उत्पादन और मांग के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है। खासकर उन समयों में जब नवीकरणीय स्रोतों से बिजली उत्पादन कम हो या बिजली की मांग अचानक बढ़ जाए, BESS तेजी से बिजली उपलब्ध करा सकता है।
भारत में BESS परियोजनाओं के लिए नीतिगत समर्थन और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया भी विकसित हो रही है। सरकार ने पहले ही बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण जैसी योजनाएं शुरू की हैं। इससे आने वाले वर्षों में स्टोरेज परियोजनाओं के विस्तार को गति मिलने की उम्मीद है।
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