द लोकतंत्र/ रायपुर : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने महिला आरक्षण संबंधी संवैधानिक संशोधन विधेयक को लेकर Indian National Congress पर तीखा हमला बोला है। रविवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस विधेयक को पारित होने से रोकने के लिए ‘बांटो और राज करो’ की नीति अपनाई। उन्होंने इसे देश की 70 करोड़ महिलाओं के साथ विश्वासघात और ‘घोर पाप’ करार दिया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि कांग्रेस ने पिछले तीन दशकों में महिला आरक्षण के मुद्दे पर केवल राजनीति की है, लेकिन जब भी इसे कानूनी रूप देने का अवसर आया, पार्टी पीछे हट गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण को लेकर गंभीर नहीं है और जब निर्णायक समय आता है, तो उसके नेता समर्थन देने के बजाय विरोध का रास्ता चुनते हैं। साय ने कहा कि यह केवल एक विधेयक का विरोध नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकारों की अनदेखी है।
वंशवाद और वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित है विरोध: भाजपा
Vishnu Deo Sai ने कांग्रेस पर वंशवादी और वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि महिला आरक्षण बिल का विरोध इसी सोच का परिणाम है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिलाओं को नेतृत्व में भागीदारी देने के रास्ते में बाधा खड़ी की है। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि इस ‘गंभीर पाप’ का राजनीतिक परिणाम कांग्रेस और उसके सहयोगियों को भुगतना पड़ेगा और देशभर की महिलाएं इसका कड़ा जवाब देंगी।
उन्होंने कहा कि केंद्र की Bharatiya Janata Party सरकार महिलाओं को राजनीतिक रूप से मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और महिला आरक्षण उसी दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। साय ने यह भी कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर भ्रम फैलाकर महिलाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन देश की महिलाएं अब सब समझ चुकी हैं।
इस दौरान भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव Arun Singh ने भी कांग्रेस के रुख को महिला-विरोधी बताते हुए कहा कि 17 अप्रैल को लोकतांत्रिक इतिहास में ‘काला अध्याय’ के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिला आरक्षण को रोककर अपनी नकारात्मक राजनीति को उजागर किया है।
महिला आरक्षण बिल को लेकर देशभर में सियासी घमासान तेज हो गया है। एक ओर भाजपा इसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इसके प्रावधानों और लागू करने की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना रह सकता है।

