द लोकतंत्र/ देवरिया ब्यूरो : हरिद्वार में 16 से 21 जून 2026 तक आयोजित चौथे RJK गोल्ड मेडल आर्चरी टूर्नामेंट में Sanjeev Singh Archery Institute के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खेल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। SBI फाउंडेशन के ACE प्रोग्राम और M3M फाउंडेशन के सहयोग से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवा तीरंदाजों ने प्रतियोगिता के शुरुआती दिनों से ही अपने कौशल और अनुशासन का परिचय दिया।
प्रतियोगिता में अंडर-10 और अंडर-15 वर्ग के खिलाड़ियों ने रैंकिंग और एलिमिनेशन राउंड में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 7 नए पदक अपने नाम किए। इसके साथ ही संस्थान की कुल पदक संख्या बढ़कर 20 हो गई है। खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने न केवल संस्थान बल्कि पूरे क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है।
एलिमिनेशन फाइनल मुकाबलों में अंडर-15 रिकर्व गर्ल्स वर्ग में प्रज्ञा सिंह ने गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। वहीं अंडर-10 कंपाउंड बॉयज़ वर्ग में उत्कर्ष ने सिल्वर मेडल हासिल किया। अंडर-10 रिकर्व बॉयज़ वर्ग में आलोक गुप्ता ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर पदक तालिका में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
Sanjeev Singh Archery Institute की प्रज्ञा सिंह और उत्कर्ष रहे आकर्षण का केंद्र, कोचिंग मॉडल की हुई सराहना
रैंकिंग राउंड में भी संजीव सिंह आर्चरी इंस्टीट्यूट के खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। प्रज्ञा सिंह ने अंडर-15 रिकर्व गर्ल्स वर्ग में गोल्ड मेडल जीता, जबकि उत्कर्ष ने अंडर-10 कंपाउंड बॉयज़ वर्ग में शीर्ष स्थान हासिल कर गोल्ड अपने नाम किया। अंडर-10 रिकर्व बॉयज़ वर्ग में आलोक गुप्ता ने सिल्वर मेडल जीतकर शानदार प्रदर्शन किया।
खिलाड़ियों की इस सफलता के पीछे उनकी लगातार मेहनत, अनुशासित प्रशिक्षण और कोचिंग स्टाफ का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संस्थान द्वारा तैयार किए जा रहे युवा तीरंदाज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भविष्य की बड़ी उम्मीद के रूप में देखे जा रहे हैं। संजीव सिंह आर्चरी इंस्टीट्यूट ने इस उपलब्धि पर सभी खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और सहयोगी स्टाफ को बधाई दी है। संस्थान ने SBI फाउंडेशन और M3M फाउंडेशन के प्रति भी आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध हो रहे हैं।
टूर्नामेंट अभी जारी है और आने वाले दिनों में खिलाड़ियों से और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि जिस आत्मविश्वास और निरंतरता के साथ ये युवा तीरंदाज प्रदर्शन कर रहे हैं, वह भारतीय तीरंदाजी के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। हरिद्वार में चल रही इस प्रतियोगिता ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर देश की युवा प्रतिभाएं किसी भी मंच पर सफलता का परचम लहरा सकती हैं।




