द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : करीब चार महीने तक चले भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री बाधाओं के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को दोबारा खोलने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल इस जलमार्ग के खुलने से भारत समेत कई देशों को ऊर्जा आपूर्ति में राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मार्ग खुलने भर से समुद्री यातायात तुरंत सामान्य नहीं होगा। पिछले कई महीनों से रुके जहाजों, सुरक्षा जांच और शिपिंग बैकलॉग के कारण पूरी तरह सामान्य स्थिति बनने में कुछ समय लग सकता है। इसके बावजूद भारत के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि सरकार और तेल कंपनियों ने सबसे पहले एलपीजी (LPG) आपूर्ति बहाल करने का फैसला किया है।
भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा होता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना सीधे तौर पर देश की ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू बाजार की स्थिरता से जुड़ा हुआ है।
Hormuz Strait खुलते ही LPG सप्लाई को दी गई प्राथमिकता, जल्द पहुंच सकती है नई खेप
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार होर्मुज में समुद्री यातायात बहाल होने के बाद सबसे पहले LPG ले जाने वाले जहाजों को भारत की ओर रवाना किया जाएगा। पिछले कुछ महीनों में गैस आपूर्ति पर सबसे अधिक असर पड़ा था, जिससे कई क्षेत्रों में लागत बढ़ी और सप्लाई चेन पर दबाव बना।
इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय तेल कंपनियों ने पहले से तैयारी शुरू कर दी है। इंडियन ऑयल समेत अन्य कंपनियां LPG और कच्चे तेल के आयात के लिए बड़े जहाजों की व्यवस्था कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक जून के अंतिम सप्ताह और जुलाई के पहले सप्ताह में LPG कार्गो लोड किए जाने की योजना बनाई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि गैस आपूर्ति सामान्य होने से घरेलू बाजार में राहत मिलेगी और ऊर्जा क्षेत्र में स्थिरता लौटेगी। इसके अलावा उद्योगों और परिवहन क्षेत्र को भी इसका लाभ मिल सकता है।
Hormuz Strait खुलने से भारत को मिलेगा बड़ा आर्थिक फायदा, तेल कीमतों पर भी असर संभव
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है, जबकि LPG की मांग का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य का दोबारा खुलना देश के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मार्केट विशेषज्ञों के अनुसार अगले 10 से 11 दिनों में समुद्री यातायात में तेजी आने की संभावना है। पहले फंसे हुए जहाजों को निकाला जाएगा, उसके बाद नए कार्गो लोड होंगे और फिर नियमित शिपिंग गतिविधियां शुरू होंगी। हालांकि सुरक्षा मंजूरी, बीमा प्रक्रियाएं और बंदरगाहों पर बढ़े दबाव के कारण पूरी तरह सामान्य स्थिति बनने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है।
यदि कच्चे तेल और LPG की आपूर्ति नियमित रूप से शुरू हो जाती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। इससे भारत के आयात बिल में कमी आने की संभावना बनेगी। साथ ही पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि होर्मुज मार्ग के दोबारा सक्रिय होने से केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी। ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता से व्यापार, परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है, जिसका फायदा आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।




