द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर एनसीपीआई (NCPI) में शामिल हुए तीन सांसद अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान और खलीलुर्रहमान ने गुरुवार (6 अगस्त) को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah से मुलाकात की। इस बैठक के दौरान सांसदों ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े लंबित मामलों और धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर अपनी मांगें गृह मंत्री के सामने रखीं।
ये तीनों सांसद उन 20 बागी नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद टीएमसी से अलग होकर एनसीपीआई का दामन थामा था। एनसीपीआई ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन दिया है, हालांकि पार्टी को अभी तक संसद में अलग संसदीय दल के रूप में मान्यता नहीं मिली है। हाल के दिनों में इन सांसदों के दोबारा टीएमसी में लौटने की अटकलें भी सामने आई थीं, लेकिन इस मुलाकात के बाद राजनीतिक चर्चाओं ने नया मोड़ ले लिया है।
Amit Shah से मुलाकात में उठाए SIR और लाउडस्पीकर के मुद्दे
बैठक के बाद सांसद खलीलुर्रहमान ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने गृह मंत्री के समक्ष दो प्रमुख मुद्दे रखे। पहला मुद्दा SIR (Special Intensive Revision) से जुड़े उन मामलों का था, जो फिलहाल ट्रिब्यूनल में लंबित हैं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे नागरिक हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं और उनके मामले ट्रिब्यूनल में विचाराधीन हैं। सांसदों ने मांग की कि इन मामलों का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए ताकि प्रभावित नागरिकों को सरकारी सेवाओं और सुविधाओं से वंचित न होना पड़े।
दूसरा मुद्दा धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों का था। सांसदों ने कहा कि यदि किसी भी धर्मस्थल पर लगाए गए लाउडस्पीकर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं, तो उनके उपयोग पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगनी चाहिए। उन्होंने इस विषय पर स्पष्ट और संतुलित नीति अपनाने की भी मांग की।
गृह मंत्री Amit Shah को सौंपा ज्ञापन, लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे की मांग
तीनों सांसदों ने अपनी मांगों से संबंधित एक विस्तृत ज्ञापन भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि मतदाता सूची से नाम हटने के कारण बड़ी संख्या में वास्तविक नागरिकों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सांसदों ने बताया कि लंबित मामलों के कारण प्रभावित लोगों को पासपोर्ट सत्यापन, भूमि पंजीकरण, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने सहित कई प्रशासनिक कार्यों में दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने गृह मंत्रालय से अनुरोध किया कि सभी वास्तविक मामलों का निपटारा इस वर्ष के अंत तक सुनिश्चित किया जाए।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि ट्रिब्यूनल की अतिरिक्त बेंच स्थापित की जाएं, शिकायतों की निगरानी के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए और जब तक मामलों का अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक प्रभावित नागरिकों को आवश्यक सरकारी सेवाओं से वंचित न किया जाए। गौरतलब है कि हाल ही में राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज थी कि अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों से जीतकर आए अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान और खलीलुर्रहमान एनडीए में सहज महसूस नहीं कर रहे हैं और टीएमसी में वापसी कर सकते हैं। हालांकि एनसीपीआई के नेताओं ने इन अटकलों को सिरे से खारिज किया था। अब अमित शाह से हुई इस मुलाकात को पश्चिम बंगाल की राजनीति और एनडीए के भीतर रणनीतिक संवाद के रूप में देखा जा रहा है।




