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ग्रेटर नोएडा में छात्र को 5 लाख के बॉन्ड का नोटिस, CJI Surya Kant की फटकार के बाद पुलिस ने दी सफाई

Commotion late at night in Ludhiana's Chhawani Mohalla; car windows smashed; CCTV footage of a youth carrying a gun has surfaced.

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी को प्रदर्शन में शामिल होने के मामले में जारी नोटिस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद मामला तूल पकड़ गया। भारत के CJI Surya Kant ने छात्र को नोटिस जारी किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई और पूछा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद मजिस्ट्रेट ने ऐसा कदम कैसे उठाया। इसके बाद ग्रेटर नोएडा पुलिस की ओर से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण जारी किया गया है।

पुलिस के मुताबिक, अक्षत त्रिपाठी को 4 सितंबर 2026 को शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से बॉन्ड भरने का नोटिस जारी किया गया था। इसमें 5 लाख रुपये के बॉन्ड और स्थानीय जमानतदारों की बात सामने आई थी। हालांकि पुलिस का कहना है कि अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद 5 सितंबर को ही इस नोटिस को निरस्त कर दिया गया था।

पुलिस ने कहा- DM का मामले से कोई संबंध नहीं, नोटिस पहले ही हो चुका निरस्त

ग्रेटर नोएडा डीसीपी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि संबंधित नोटिस कार्यालय मजिस्ट्रेट तृतीय की ओर से जारी किया गया था। पुलिस के अनुसार, गौतमबुद्धनगर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के कारण इस तरह का नोटिस कार्यालय मजिस्ट्रेट तृतीय से जारी हुआ था और इसमें जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर का कोई संबंध नहीं है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि नोटिस जारी करने में हुई लापरवाही को लेकर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पहले ही शुरू की जा चुकी है। पुलिस के मुताबिक, नोटिस को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद निरस्त कर दिया गया था।

विवाद तब और बढ़ा जब सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास ने इस मामले को लेकर गौतमबुद्धनगर के डीएम का जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या डीएम ने सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर के आदेश को नहीं पढ़ा है। दास ने कहा कि अक्षत त्रिपाठी को 5 लाख रुपये का बॉन्ड भरने की जरूरत नहीं है और छात्रों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

CJI Surya Kant ने जताई नाराजगी, मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण लेने की बात

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने नोटिस जारी किए जाने पर कड़ी टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह बात रखी गई कि छात्र के खिलाफ जारी नोटिस वापस लिया जा चुका है। इसके बावजूद सवाल यह उठा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश के बावजूद ऐसा नोटिस जारी कैसे हुआ।

बताया गया कि 4 सितंबर को BNS की धारा 130 के तहत यह नोटिस जारी किया गया था। इसमें छात्र पर प्रदर्शन के लिए छात्रों को कथित तौर पर उकसाने और सरकार विरोधी या गुमराह करने वाली जानकारी फैलाने जैसे आरोप लगाए गए थे। नोटिस में 5 लाख रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड और दो स्थानीय जमानतदारों की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट में वकील की ओर से यह भी बताया गया कि नोटिस वापस लिया जा चुका है, लेकिन इसे कोर्ट के आदेश की अवहेलना में जारी किया गया था। इस पर CJI सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कोर्ट संबंधित मजिस्ट्रेट से स्पष्टीकरण लेगा।

इस पूरे विवाद में अब पुलिस ने अपनी स्थिति साफ करते हुए नोटिस को त्रुटिपूर्ण बताया है और कहा है कि इसे पहले ही निरस्त किया जा चुका है। साथ ही पुलिस ने जिलाधिकारी को इस प्रकरण से अलग बताया है। अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से मजिस्ट्रेट से मांगे जाने वाले स्पष्टीकरण और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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Team The Loktantra

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