द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के खिलाफ शिकायत दर्ज कराए जाने का मामला सामने आया है। श्री राम सेना के अमित कुमार ने रविवार, 30 अगस्त 2026 को कोतवाली थाने में शिकायत देकर राहुल गांधी पर उनके खिलाफ कथित तौर पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से मामले में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि, हल्द्वानी जिला पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभी तक राहुल गांधी के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पुलिस के अनुसार, श्री राम सेना के अमित कुमार की ओर से दी गई शिकायत की जांच की जा रही है। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई को लेकर फैसला लिया जाएगा। यह मामला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की हल्द्वानी में हुई रैली के बाद शुरू हुए विवाद से जुड़ा है। रैली के बाद श्री राम सेना के सदस्यों की ओर से कथित तौर पर शुद्धिकरण हवन किए जाने का मामला सामने आया था। इस घटना को लेकर राहुल गांधी ने कार्रवाई की मांग की थी।
शुद्धिकरण हवन विवाद के बाद बढ़ा राजनीतिक टकराव
शुद्धिकरण हवन को लेकर पहले ही कांग्रेस और श्री राम सेना के बीच आरोप-प्रत्यारोप सामने आ चुके हैं। राहुल गांधी ने इस घटना को लेकर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। अब श्री राम सेना की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दिए जाने के बाद विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास के सदस्य विनोद आर्य ने शुद्धिकरण विवाद पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सनातन परंपरा के अनुयायी के तौर पर उस स्थान की स्वच्छता सुनिश्चित करना उनका अधिकार और कर्तव्य है, जहां भगवान श्री राम की पूजा और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
आर्य ने यह भी कहा कि वह स्वयं दलित समाज से आते हैं और शुद्धिकरण गतिविधि के दौरान उनके साथ दलित समुदाय के अन्य लोग भी मौजूद थे। उनके मुताबिक, इस पूरी गतिविधि में कुछ भी गलत नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद श्री राम सेना के सदस्यों पर कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का दबाव बनाया जा रहा है। आर्य ने कहा कि यदि उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है तो वे भी राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने का अधिकार रखते हैं।
फिलहाल पुलिस अमित कुमार की शिकायत की जांच कर रही है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर एफआईआर दर्ज की जाती है या नहीं। इस पूरे घटनाक्रम ने हल्द्वानी के शुद्धिकरण हवन विवाद को एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में ला दिया है।




