द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख Mohan Bhagwat के अमेरिका के न्यूयॉर्क में दिए गए एक बयान को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भागवत ने अपने कार्यक्रम में कहा था कि अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रहेगा। अब ओवैसी ने इस बयान पर पलटवार करते हुए इसे RSS की “पुरानी चाल” करार दिया है।
ओवैसी ने कहा कि कुछ बातें दुनिया के सामने कहने के लिए होती हैं, जबकि कुछ बातें संगठन के सदस्यों के लिए होती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि RSS ने अपने पुराने विचारकों और लेखकों के उन विचारों से कभी दूरी बनाई है या नहीं, जिनमें मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को लेकर टिप्पणियां की गई हैं। AIMIM प्रमुख ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में RSS के संस्थापक के जीवन और संगठन से जुड़े साहित्य का हवाला देते हुए कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि RSS की विचारधारा और उसके पुराने साहित्य को समझे बिना केवल सार्वजनिक बयानों के आधार पर संगठन की भूमिका का आकलन नहीं किया जा सकता।
गोलवलकर की किताबों और RSS की विचारधारा का ओवैसी ने किया जिक्र
ओवैसी ने अपने बयान में एमएस गोलवलकर की किताब ‘Bunch of Thoughts’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पुस्तक में मुसलमानों और ईसाइयों को भारत के लिए “आंतरिक खतरे” के तौर पर प्रस्तुत किया गया था। ओवैसी ने कहा कि गोलवलकर के पुराने विचारों को भी सार्वजनिक बहस का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने RSS के लोकतंत्र को लेकर कथित पुराने विचारों का हवाला देते हुए गोलवलकर की अन्य रचनाओं का भी जिक्र किया। ओवैसी ने दावा किया कि संगठन के पुराने साहित्य में एक नेता, एक विचारधारा और एक भगवा ध्वज की अवधारणा पर जोर दिया गया था।
ओवैसी ने गुजरात दंगों का भी जिक्र करते हुए RSS और उससे जुड़े राजनीतिक प्रभाव पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में मुसलमानों के साथ गंभीर हिंसा हुई थी और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठे थे। AIMIM प्रमुख ने समान नागरिक संहिता (UCC), धर्मांतरण विरोधी कानून और UAPA जैसे मुद्दों को भी RSS की विचारधारा से जोड़ते हुए अपनी आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि इन प्रावधानों का इस्तेमाल अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
ओवैसी ने मोहन भागवत से अपील करते हुए कहा कि वे सावरकर, हेडगेवार और गोलवलकर की रचनाओं के कुछ हिस्से सार्वजनिक रूप से पढ़ें, ताकि लोग खुद RSS की विचारधारा को समझकर अपनी राय बना सकें। फिलहाल, यह पूरा विवाद मोहन भागवत के हालिया बयान और उस पर ओवैसी की प्रतिक्रिया के इर्द-गिर्द केंद्रित है। ओवैसी के आरोपों पर RSS की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है।




