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वंदे मातरम पर कांग्रेस का रुख साफ, Shashi Tharoor बोले- पार्टी कार्यक्रमों में दो पदों की परंपरा रहेगी जारी

Congress's stance on Vande Mataram is clear; Shashi Tharoor says the tradition of singing two verses at party events will continue.

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर पार्टी के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा है कि कांग्रेस अपने कार्यक्रमों में लंबे समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार राष्ट्रगान के एक अंतरे और ‘वंदे मातरम’ के दो पदों का गायन जारी रखेगी। तिरुवनंतपुरम में थरूर ने कहा कि किसी राष्ट्रीय या सरकारी कार्यक्रम और राजनीतिक दल के कार्यक्रम में अंतर को समझना जरूरी है। सरकारी या राष्ट्रीय कार्यक्रम में जो भी राष्ट्रगीत या राष्ट्रगान निर्धारित हो, उसका सभी को पूरे सम्मान के साथ पालन करना चाहिए।

थरूर के मुताबिक कांग्रेस के कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के दो पद गाने की परंपरा कोई हालिया फैसला नहीं है, बल्कि इसका इतिहास कई दशक पुराना है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में 1937 से राष्ट्रगान के एक अंतरे और ‘वंदे मातरम’ के दो पदों को लेकर एक व्यवस्था चली आ रही है और पार्टी आगे भी अपने कार्यक्रमों में इसी परंपरा का पालन करेगी। उनके इस बयान के बाद ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस ने अपने रुख को एक बार फिर सामने रखा है।

1937 में क्यों तय हुई थी ‘वंदे मातरम’ के दो पदों की परंपरा?

‘वंदे मातरम’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया था। गीत के शुरुआती दो पदों में मातृभूमि की स्तुति की गई है, जबकि आगे के पदों में दुर्गा सहित हिंदू धार्मिक प्रतीकों का उल्लेख मिलता है।

इन्हीं धार्मिक संदर्भों को लेकर उस समय कुछ मुस्लिम नेताओं और मुस्लिम लीग की ओर से आपत्ति जताई गई थी। इसके बाद वर्ष 1937 में कांग्रेस ने राष्ट्रीय कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो पदों को गाने की व्यवस्था अपनाई। कांग्रेस का कहना है कि यह निर्णय उस समय महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और अन्य प्रमुख नेताओं की सहमति से लिया गया था। शशि थरूर ने इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस आज भी अपने राजनीतिक और संगठनात्मक कार्यक्रमों में उसी परंपरा को आगे बढ़ा रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय या सरकारी कार्यक्रमों में सभी लोगों को निर्धारित प्रोटोकॉल और गीत का सम्मान करना चाहिए।

राष्ट्रीय कार्यक्रम और कांग्रेस के कार्यक्रम में अंतर पर थरूर ने दिया जोर

थरूर ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ को लेकर किसी भी विवाद को समझने के लिए सबसे पहले कार्यक्रम की प्रकृति देखना जरूरी है। यदि कार्यक्रम राष्ट्रीय या सरकारी है तो उसमें निर्धारित व्यवस्था के अनुसार पूरे सम्मान के साथ शामिल होना चाहिए। वहीं कांग्रेस के संगठनात्मक कार्यक्रमों में पार्टी अपनी ऐतिहासिक परंपरा के मुताबिक राष्ट्रगान के एक अंतरे और ‘वंदे मातरम’ के दो पदों का गायन करती रही है।

कांग्रेस नेता के इस बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब ‘वंदे मातरम’ के पूरे गीत को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस तेज है। थरूर ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि कांग्रेस का मौजूदा रुख किसी नए राजनीतिक फैसले का परिणाम नहीं, बल्कि 1937 से चली आ रही पार्टी की ऐतिहासिक परंपरा पर आधारित है।

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Team The Loktantra

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