द लोकतंत्र/ पटना : पटना में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और संभावित किल्लत की चर्चाओं के बीच लोगों की चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। बिहार की राजधानी के कई पेट्रोल पंपों पर शुक्रवार से अचानक भीड़ बढ़ गई, जहां बड़ी संख्या में लोग अपनी गाड़ियों की फुल टंकी कराने पहुंचने लगे। इस बढ़ती भीड़ और अफवाहों के माहौल के बीच पेट्रोल पंप संचालकों ने सीमित मात्रा में ईंधन देने का फैसला लिया है।
हालांकि, पेट्रोलियम कंपनियों की ओर से फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है, जिसमें फुल टंकी पर रोक लगाने या सीमित ईंधन देने की बात कही गई हो। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर स्थिति को नियंत्रित रखने और सभी ग्राहकों तक पेट्रोल-डीजल पहुंचाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
पटना के पेट्रोल पंप संचालक अरविंद कुमार ने कहा कि लोगों के बीच अफवाहों को रोकने और हर जरूरतमंद तक ईंधन उपलब्ध कराने के लिए यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर कुछ लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन भरवा लेते हैं, तो बाद में दूसरे ग्राहकों को परेशानी हो सकती है और इससे बाजार में घबराहट बढ़ सकती है।
सीमित मात्रा में मिलेगा ईंधन, जरूरत के हिसाब से होगी सप्लाई
अरविंद कुमार के मुताबिक, फिलहाल बाइक, कार, ट्रक, बस, ट्रैक्टर और अन्य बड़े वाहनों को उनकी जरूरत के हिसाब से पेट्रोल और डीजल दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था केवल एहतियात के तौर पर लागू की गई है ताकि किसी तरह की कृत्रिम किल्लत का माहौल न बने।
उन्होंने कहा, हम नहीं चाहते कि लोग अफवाहों में आकर जरूरत से ज्यादा ईंधन स्टोर करें। अगर हर व्यक्ति फुल टंकी कराएगा, तो सप्लाई पर दबाव बढ़ेगा और इससे बाजार में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन को लेकर इस तरह की मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया अक्सर तब देखने को मिलती है जब कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है या सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है।
कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई ने बढ़ाई चिंता
गौरतलब है कि हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद अब आने वाले दिनों में और महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। युद्ध और वैश्विक तनाव से पहले जहां क्रूड ऑयल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, वहीं अब इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। इससे तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
आर्थिक संस्था Emkay Global की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तेल कंपनियों को मौजूदा समय में पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर 17 से 18 रुपये तक का नुकसान हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि कीमतों में और बढ़ोतरी नहीं की गई तो कंपनियों को इस तिमाही में 57 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी बीच Amul और Mother Dairy ने भी दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल, गैस सिलेंडर और दूध की कीमतें बढ़ने से खुदरा महंगाई पर सीधा असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले समय में आम लोगों की जेब पर महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।

