द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ी चेतावनी देते हुए साफ कहा है कि अगर वह आतंकियों को पनाह देना और भारत विरोधी गतिविधियों को जारी रखता है, तो उसे तय करना होगा कि वह भूगोल और इतिहास का हिस्सा बना रहना चाहता है या नहीं।
शनिवार को आयोजित ‘सेना संवाद’ कार्यक्रम में बोलते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि भारत अपनी सुरक्षा, संप्रभुता और नागरिकों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह कार्यक्रम यूनिफॉर्म अनवील्ड द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य रणनीति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
कार्यक्रम के दौरान जनरल द्विवेदी से सवाल पूछा गया कि यदि भविष्य में फिर से वैसी परिस्थितियां बनती हैं जैसी ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बनी थीं, तो भारतीय सेना की प्रतिक्रिया क्या होगी। इस पर सेना प्रमुख ने स्पष्ट संकेत दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरतेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सेना प्रमुख का यह बयान केवल सैन्य चेतावनी नहीं, बल्कि पाकिस्तान को स्पष्ट रणनीतिक संदेश भी है कि भारत अब आतंकवाद को लेकर पहले से कहीं अधिक आक्रामक और निर्णायक रुख अपनाने की स्थिति में है।
ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के बीच आया बयान
जनरल उपेंद्र द्विवेदी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में भारत और उसकी सशस्त्र सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ मनाई है। इस सैन्य अभियान के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए सटीक कार्रवाई की थी। सेना की इस कार्रवाई में कई आतंकी ढांचे और लॉन्च पैड तबाह किए गए थे।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की उस नई रणनीति का हिस्सा माना गया, जिसमें सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियों का जवाब सीधे और सटीक सैन्य कार्रवाई से दिया गया। सेना प्रमुख के हालिया बयान को उसी नीति की निरंतरता के तौर पर देखा जा रहा है। उनका संदेश यह संकेत देता है कि यदि भविष्य में भारत की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने की कोशिश हुई, तो जवाब और अधिक सख्त हो सकता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर भारत का सख्त रुख
भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप लगाता रहा है। नई दिल्ली का कहना है कि सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। जनरल द्विवेदी के बयान के बाद राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। कई रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत अब अपनी सुरक्षा नीति को और अधिक आक्रामक तरीके से लागू कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय सेना का यह स्पष्ट संदेश केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि उन सभी ताकतों के लिए भी है जो भारत की संप्रभुता और सुरक्षा को चुनौती देने की कोशिश कर सकती हैं। भारत सरकार और सेना लगातार यह दोहरा रहे हैं कि आतंकवाद और वार्ता एक साथ नहीं चल सकते। ऐसे में सेना प्रमुख का यह बयान आने वाले समय में भारत की सुरक्षा रणनीति की दिशा को और स्पष्ट करता है।

