द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : दक्षिण दिल्ली के Satya Niketan इलाके में एक पांच मंजिला इमारत गिरने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई तरह के दावे सामने आए। हादसे में तीन लोगों की मौत के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी सोशल मीडिया के जरिए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने देश में शैक्षणिक संस्थानों और छात्रों से जुड़े बुनियादी ढांचे की स्थिति पर सवाल उठाए और हादसे को दिल्ली विश्वविद्यालय से जोड़कर अपनी चिंता जाहिर की।
हालांकि, दीपके के दावे के बाद केंद्र सरकार की पत्र सूचना कार्यालय (PIB) फैक्ट चेक विंग ने सोशल मीडिया पर चल रहे दावों की पड़ताल की। PIB ने स्पष्ट किया कि सत्य निकेतन में गिरी इमारत दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस का हॉस्टल नहीं थी। सरकार की फैक्ट चेक विंग ने इसे लेकर सोशल मीडिया पर वायरल दावे को भ्रामक बताया।
PIB ने बताया- DU का हॉस्टल नहीं थी गिरी इमारत Satya Niketan
PIB फैक्ट चेक विंग के मुताबिक, सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस में हॉस्टल की एक इमारत गिर गई है। PIB ने इस दावे को गलत और गुमराह करने वाला बताया। फैक्ट चेक के अनुसार, जिस इमारत के गिरने की घटना हुई, वह दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में स्थित प्राइवेट पेइंग गेस्ट (PG) अकोमोडेशन थी।
यानी हादसे में ढही इमारत दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस का आधिकारिक हॉस्टल नहीं थी। PIB ने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर सामने आने वाले ऐसे दावों को आगे साझा करने से पहले उनकी पुष्टि विश्वसनीय और आधिकारिक स्रोतों से जरूर करें। यह फैक्ट चेक ऐसे समय सामने आया जब हादसे के बाद इमारत को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे तेजी से प्रसारित हो रहे थे। सरकार की ओर से जारी स्पष्टीकरण का मुख्य फोकस इमारत की पहचान को लेकर किए जा रहे दावे पर था।
अभिजीत दीपके ने पीएम मोदी से पूछे थे सवाल
हादसे के बाद अभिजीत दीपके ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लिया था। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री ने घटना से एक दिन पहले दिल्ली विश्वविद्यालय का दौरा किया था और वहां राजनीतिक भाषण दिया था। दीपके ने आरोप लगाया कि उस दौरान देश के शैक्षणिक बुनियादी ढांचे की स्थिति पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई। दीपके ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के नजदीक एक छात्रावास की इमारत ढह गई और आशंका जताई कि कई छात्र मलबे में फंसे हो सकते हैं। इसी आधार पर उन्होंने छात्रों की सुरक्षा और शैक्षणिक संस्थानों के बुनियादी ढांचे को लेकर सरकार से सवाल किए।
उन्होंने आदिवासी क्षेत्रों में छात्रों की मौत और राजधानी दिल्ली में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। दीपके ने सुरक्षित कक्षाओं, सुरक्षित हॉस्टल और छात्रों के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाओं की मांग की। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल किया कि क्या वह दोबारा दिल्ली विश्वविद्यालय का दौरा कर यह बताएंगे कि इमारत कैसे गिरी।
हालांकि, PIB के फैक्ट चेक के मुताबिक हादसे में ढही इमारत दिल्ली विश्वविद्यालय का हॉस्टल नहीं, बल्कि एक निजी PG थी। इसलिए हादसे को सीधे DU साउथ कैंपस के हॉस्टल के ढहने के रूप में पेश करने वाला दावा भ्रामक बताया गया है। दीपके की ओर से उठाए गए व्यापक शैक्षणिक बुनियादी ढांचे और छात्रों की सुरक्षा से जुड़े राजनीतिक सवाल अलग विषय हैं, जबकि PIB की आपत्ति मुख्य रूप से हादसे वाली इमारत की पहचान को लेकर किए गए दावे पर है।




