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CBSE 12वीं री-इवैल्यूएशन पर फिर उठे सवाल, छात्र का दावा- ‘जिन विषयों के लिए आवेदन नहीं किया, उन्हीं में बढ़ गए नंबर’

Questions raised again regarding CBSE Class 12 re-evaluation; student claims marks increased in subjects for which no application was filed.

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 12वीं की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। एक छात्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया है कि री-इवैल्यूएशन का परिणाम आने के बाद उसके केवल दो अंक बढ़ाए गए, लेकिन हैरानी की बात यह है कि ये अंक उन विषयों में बढ़े हैं, जिनके लिए उसने पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) का आवेदन ही नहीं किया था। छात्र ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर चिंता जताई है।

इससे पहले भी यही छात्र दावा कर चुका था कि री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के दौरान उसे फिजिक्स विषय की जगह किसी अन्य छात्र की उत्तर पुस्तिका दिखाई गई थी। बाद में आपत्ति दर्ज कराने के बाद कथित तौर पर उसे सही उत्तर पुस्तिका उपलब्ध कराई गई। हालांकि, अब नए परिणाम के बाद छात्र ने फिर से बोर्ड की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। फिलहाल इस मामले पर CBSE की ओर से कोई आधिकारिक बयान या स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।

छात्र का दावा- CBSE में आवेदन 11 प्रश्नों के लिए किया, बढ़े दूसरे विषयों में अंक

री-इवैल्यूएशन का परिणाम घोषित होने के बाद छात्र वेदांत ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उसने पूरी प्रक्रिया पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। वीडियो में छात्र का दावा है कि उसने कुल 11 प्रश्नों के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था। इसके बावजूद अंतिम परिणाम में केवल दो अंक बढ़े।

छात्र के अनुसार, जिन प्रश्नों और विषयों के लिए उसने री-इवैल्यूएशन का अनुरोध किया था, उनमें कोई बदलाव नहीं किया गया। इसके बजाय उसे गणित (Mathematics) और कंप्यूटर साइंस (Computer Science) विषय में अतिरिक्त अंक दिए गए, जबकि उसके अनुसार इन विषयों के लिए उसने आवेदन नहीं किया था। वेदांत का कहना है कि इस वजह से उसे पूरी री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया पर संदेह हो रहा है। हालांकि, यह छात्र का व्यक्तिगत दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

CBSE पर पहले भी गलत उत्तर पुस्तिका दिखाने का लगाया था आरोप

छात्र का दावा है कि 13 मई को सीबीएसई बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद जब उसने उत्तर पुस्तिका देखने की प्रक्रिया पूरी की, तब उसे फिजिक्स विषय की जगह किसी दूसरे छात्र की कॉपी दिखाई गई थी। उसके अनुसार, उसने इस संबंध में बोर्ड के समक्ष औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई, जिसके बाद उसे कथित तौर पर सही उत्तर पुस्तिका उपलब्ध कराई गई। छात्र का कहना है कि इसके बाद उसके अंकों में कुछ बदलाव हुआ, लेकिन वर्तमान री-इवैल्यूएशन परिणाम ने फिर से कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

इस पूरे मामले में अब तक CBSE की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बोर्ड ने न तो छात्र के आरोपों की पुष्टि की है और न ही उन्हें खारिज किया है। ऐसे में फिलहाल उपलब्ध जानकारी छात्र के सोशल मीडिया पोस्ट और उसके दावों पर आधारित है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मूल्यांकन और री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और स्पष्ट होनी चाहिए। यदि किसी छात्र को प्रक्रिया को लेकर शिकायत है तो उसका समयबद्ध और तथ्यात्मक समाधान होना आवश्यक है। वहीं, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले बोर्ड के आधिकारिक पक्ष का इंतजार करना भी उतना ही जरूरी है।

यह भी पढ़ें – फडणवीस-उद्धव की एक साथ फ्लाइट पर गरमाई महाराष्ट्र की राजनीति, Eknath Shinde का तंज- ‘चालबाज दोस्त सबसे खतरनाक’

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