द लोकतंत्र / नई दिल्ली : SIR Controversy को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गुरुवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीपके ने ज्ञानेश कुमार को देश का ‘सबसे बड़ा देशद्रोही’ बताते हुए उनके इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि Special Intensive Revision (SIR) के दौरान 13 करोड़ से ज्यादा नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों से जुड़ा है। हालांकि, इन नामों को गलत तरीके से हटाए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
13 करोड़ से ज्यादा नाम हटने का दावा
अभिजीत दीपके ने कहा कि 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटना कोई छोटी संख्या नहीं है। उनके मुताबिक, यह 2024 लोकसभा चुनाव के समय देश में दर्ज करीब 97 करोड़ मतदाताओं का लगभग 13-14 प्रतिशत है। उन्होंने इस संख्या की तुलना 2024 के लोकसभा चुनाव में NDA और विपक्ष के बीच बताए गए करीब 2 प्रतिशत के अंतर से भी की। ये आंकड़े और तुलना दीपके के बयान का हिस्सा हैं।
दीपके ने कुछ प्रमुख नेताओं के निर्वाचन क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र से करीब 50 हजार वोट, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के निर्वाचन क्षेत्र से करीब 1 लाख और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निर्वाचन क्षेत्र से करीब 40 हजार वोट हटाए गए। उन्होंने इन आंकड़ों को चुनावी नतीजों से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि क्या इसके पीछे कोई तय रणनीति थी। ये सभी दावे दीपके द्वारा लगाए गए आरोप हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि केरल में वोट हटाए जाने का असर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ा। दीपके ने कहा कि इन घटनाओं में उन्हें एक पैटर्न नजर आता है।
48 घंटे का अल्टीमेटम, देशभर में आंदोलन की चेतावनी
CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देने के लिए 48 घंटे का समय दिया है। दीपके ने कहा कि अगर इस अवधि में इस्तीफा नहीं दिया गया तो पार्टी देशभर में आंदोलन करेगी। उन्होंने दिल्ली में धरने के साथ देशभर में विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी और इसे ‘Jantar Mantar 2.0’ के रूप में आगे बढ़ाने की बात कही।
CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने पार्टी की तीन प्रमुख मांगें बताईं। इनमें CEC का इस्तीफा, ज्ञानेश कुमार और कथित तौर पर उन्हें निर्देश देने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई तथा आगामी चुनावों को फिलहाल रोकना शामिल है। पार्टी ने SIR को 2025 की मतदाता सूची की स्थिति में वापस लाने की भी मांग की है।
चुनाव आयोग के अंदर मतभेद की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब चुनाव आयोग के अंदर SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को लेकर मतभेद की रिपोर्ट सामने आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज की। इनमें मतदाता नाम जोड़ने और हटाने, Form-6 में बदलाव और चुनावी डेटा व सॉफ्टवेयर के केंद्रीकरण जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं।
CJP ने SIR से जुड़ी फाइलों को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली समिति के पास रखने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को खत्म करने की भी मांग की है। पार्टी ने SIR को 2025 की मतदाता सूची की स्थिति में वापस लाने की मांग भी रखी है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR समेत पिछले एक साल में लिए गए फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी मिली थी। आयोग ने अलग-अलग राय और लिखित टिप्पणियों को आंतरिक चर्चा और संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
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