द लोकतंत्र/ लखनऊ : UP Cabinet Expansion उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से चर्चाओं में चल रहा योगी मंत्रिमंडल विस्तार अब आधिकारिक रूप से तय हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट का विस्तार रविवार 10 मई को दोपहर 3:30 बजे किया जाएगा। इसको लेकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस विस्तार के जरिए भारतीय जनता पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने की बड़ी रणनीति पर काम कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक, इस बार सिर्फ नए चेहरों की एंट्री ही नहीं होगी, बल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है। यही वजह है कि लखनऊ में बीजेपी नेताओं और संभावित मंत्रियों की गतिविधियां अचानक बढ़ गई हैं। पार्टी और सरकार के बड़े पदाधिकारियों के बीच शनिवार रात तक लगातार बैठकों और बातचीत का दौर जारी रहा।
बताया जा रहा है कि योगी कैबिनेट में छह नए मंत्री शामिल किए जा सकते हैं। जिन नेताओं के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, उनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, रायबरेली से विधायक मनोज पांडेय, फतेहपुर की विधायक कृष्णा पासवान, अलीगढ़ के सुरेंद्र दिलेर, हंसराज विश्वकर्मा और आशा मौर्य प्रमुख हैं। बीजेपी इन चेहरों के जरिए दलित, पिछड़ा वर्ग और गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक को मजबूत संदेश देना चाहती है।
जातीय संतुलन और 2027 चुनाव पर बीजेपी का फोकस
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार पूरी तरह 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को उत्तर प्रदेश में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं मिला था, जिसके बाद पार्टी ने जातीय समीकरणों पर विशेष फोकस बढ़ा दिया है।
भूपेंद्र चौधरी के जरिए जाट और पश्चिमी यूपी, मनोज पांडेय के जरिए ब्राह्मण समाज, कृष्णा पासवान के जरिए दलित वर्ग और आशा मौर्य व हंसराज विश्वकर्मा जैसे चेहरों के जरिए पिछड़े वर्गों को साधने की कोशिश मानी जा रही है। बीजेपी की रणनीति साफ तौर पर समाजवादी पार्टी की PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति की काट तैयार करने की दिखाई दे रही है।
राज्यपाल से मुलाकात के बाद तेज हुई चर्चाएं
शनिवार शाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं और तेज हो गईं। इसके बाद यह लगभग साफ हो गया कि रविवार को शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा।
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी रविवार के अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं। वहीं सभी मंत्रियों को दोपहर 3 बजे तक लोक भवन पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं। इससे संकेत मिल रहे हैं कि विस्तार के साथ कुछ बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं।
फिलहाल उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में 54 मंत्री हैं, जबकि संवैधानिक रूप से 60 मंत्रियों तक जगह उपलब्ध है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि खाली पदों को भरने के साथ-साथ कुछ पुराने चेहरों को हटाकर नई राजनीतिक ऊर्जा और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की जाएगी।

