द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़कर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करने वाले बागी सांसदों को लेकर टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि एनडीए में शामिल होने वाले कई पूर्व टीएमसी नेता अब वहां खुद को असहज महसूस कर रहे हैं और पार्टी में वापसी को लेकर बातचीत चल रही है। उनके इस बयान ने बंगाल की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, शनिवार (1 अगस्त) को मीडिया से बातचीत के दौरान सौगत रॉय ने कहा कि कुछ पूर्व टीएमसी नेता उनके संपर्क में हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा गठबंधन में शामिल होने के बाद उन नेताओं पर वहां बने रहने का दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन वे मौजूदा राजनीतिक स्थिति से संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि उन्होंने किसी संभावित वापसी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की, लेकिन संकेत दिए कि यदि बातचीत सफल रही तो राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
‘कुछ नेता हमारे संपर्क में हैं’, TMC नेता सौगत रॉय का बड़ा दावा
सौगत रॉय ने कहा कि उन्होंने कुछ पूर्व टीएमसी नेताओं से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की है। उनके मुताबिक, ये नेता भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन में सहज महसूस नहीं कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उन पर राजनीतिक दबाव और पार्टी में बने रहने के लिए धमकियां तक दी जा रही हैं। टीएमसी सांसद ने कहा, “अगर वे वापस आते हैं तो यह हमारे लिए अच्छी बात होगी। मैंने इस विषय पर अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व से भी चर्चा की है।” उन्होंने यह भी कहा कि जिन नेताओं ने टीएमसी छोड़ी थी, उस समय यह तय नहीं था कि वे भाजपा या एनडीए के साथ जाएंगे। मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें अपने राजनीतिक आधार और समुदाय के प्रति जवाबदेही निभाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
सौगत रॉय ने विशेष रूप से अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान का उल्लेख करते हुए दावा किया कि ये नेता भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर सहज नहीं हैं और एनडीए के साथ अपनी राजनीतिक भूमिका को लेकर पुनर्विचार कर रहे हैं। हालांकि संबंधित नेताओं की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
NDA बैठक से दूरी के बाद बढ़ीं अटकलें, क्या बदलेंगे बंगाल के सियासी समीकरण?
सौगत रॉय का बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में एनसीपीआई (NCPI) की बैठक से तीन सांसदों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए थे। बीते 28 जुलाई को आयोजित एनडीए की बैठक में अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान शामिल नहीं हुए थे। इसके बाद उनके भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन से असंतोष की चर्चाएं तेज हो गई थीं।
हालांकि एनसीपीआई ने इन अटकलों को खारिज करने की कोशिश की थी, लेकिन टीएमसी नेताओं का दावा है कि इन सांसदों के भीतर गठबंधन को लेकर असहमति बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन नेताओं की वापसी होती है तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में इसका बड़ा असर पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य की राजनीति लगातार नए समीकरणों की ओर बढ़ रही है।
गौरतलब है कि विधानसभा चुनावों में हार के बाद टीएमसी के करीब 20 बागी सांसदों ने पार्टी छोड़ दी थी और बाद में उन्होंने राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी (NCPI) का दामन थामते हुए एनडीए को समर्थन देने की घोषणा की थी। अब सौगत रॉय के ताजा दावे के बाद एक बार फिर इन नेताओं की राजनीतिक दिशा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, फिलहाल किसी भी संभावित वापसी या दल-बदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।




