द लोकतंत्र/लखनऊ: Uttar Pradesh में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी (SP) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी से बगावत कर चुके तीन विधायकों ने बुधवार को औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। BJP में शामिल होने वालों में अमेठी की गौरीगंज सीट से राकेश प्रताप सिंह, अयोध्या की गोसाईगंज सीट से अभय सिंह और जालौन की कालपी सीट से विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं। इन विधायकों के भाजपा में शामिल होने को यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरणों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
राकेश प्रताप सिंह समेत तीन विधायकों ने थामा BJP का दामन
बुधवार को अमेठी के गौरीगंज में आयोजित कार्यक्रम में तीनों विधायकों ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, BJP Uttar Pradesh अध्यक्ष पंकज चौधरी, पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरपाल मौर्य और मंत्री दारा सिंह चौहान समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समर्थक पहुंचे।
भाजपा में शामिल होने के बाद राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि उनके क्षेत्र के लोगों ने उनसे भाजपा की सदस्यता लेने का अनुरोध किया था और उन्हें समर्थन देने का भरोसा जताया था।
उन्होंने दावा किया कि उनके साथ बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि और पूर्व जनप्रतिनिधि भी भाजपा में शामिल होंगे। राकेश प्रताप सिंह के मुताबिक, करीब एक हजार लोग उनके साथ पार्टी की सदस्यता ले सकते हैं।
तीन बार सपा के टिकट पर विधायक बने राकेश प्रताप सिंह की क्यों बढ़ीं दूरियां?
गौरीगंज से तीन बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए राकेश प्रताप सिंह की पार्टी नेतृत्व से दूरियां पिछले कुछ वर्षों में बढ़ती गईं। धार्मिक मुद्दों पर उनके रुख और सपा की राजनीतिक दिशा को लेकर मतभेद सामने आए। स्वामी प्रसाद मौर्य की रामचरितमानस और अन्य धार्मिक विषयों पर की गई टिप्पणियों के विरोध में राकेश प्रताप सिंह ने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी थी। इसके बाद पार्टी नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में तल्खी बढ़ने लगी।
2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी राकेश प्रताप सिंह ने सपा के रुख से अलग जाते हुए BJP प्रत्याशी स्मृति ईरानी के पक्ष में प्रचार किया था। इससे पार्टी के साथ उनके मतभेद और अधिक स्पष्ट हो गए।
राम मंदिर तक पदयात्रा और सपा से निष्कासन तक की कहानी
राकेश प्रताप सिंह ने गौरीगंज से अयोध्या स्थित राम मंदिर तक पदयात्रा भी निकाली थी। धार्मिक मुद्दों पर उनके रुख और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के बीच समाजवादी पार्टी ने उन्हें निष्कासित कर दिया था। राकेश प्रताप सिंह ने BJP में शामिल होने के बाद कहा कि वह राष्ट्र और राम के लिए भाजपा का साथ दे रहे हैं। उनके इस बयान को उनकी राजनीतिक विचारधारा और भाजपा के साथ बढ़ती नजदीकी के संदर्भ में देखा जा रहा है।
अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी के BJP में आने से क्या बदलेगा?
अयोध्या की गोसाईगंज सीट से विधायक अभय सिंह और जालौन की कालपी सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी का भाजपा में शामिल होना भी इस घटनाक्रम का अहम हिस्सा है। तीनों विधायक पहले ही सपा से दूरी बना चुके थे, लेकिन अब भाजपा की सदस्यता लेकर उन्होंने अपने राजनीतिक कदम को औपचारिक रूप दे दिया है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दलों के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। ऐसे में इन विधायकों का
BJP में शामिल होना सपा के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकता है। हालांकि, इसका चुनावी असर कितना होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल, तीन बागी विधायकों के भाजपा में शामिल होने से यूपी की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस घटनाक्रम के बाद सपा और भाजपा अपनी चुनावी रणनीति को किस तरह आगे बढ़ाती हैं।
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