द लोकतंत्र/ लखनऊ : UP Cabinet Expansion 2026 उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार 2.0 का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार आखिरकार रविवार को संपन्न हो गया। राजधानी लखनऊ स्थित जन भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने आठ नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस विस्तार को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की बड़ी राजनीतिक और सामाजिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
योगी मंत्रिमंडल विस्तार में बीजेपी ने जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी और रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक मनोज कुमार पाण्डेय को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। वहीं डॉ. सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल को राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में प्रमोट किया गया। इसके अलावा कृष्णा पासवान, कैलाश सिंह राजपूत, सुरेंद्र दिलेर और हंसराज विश्वकर्मा को पहली बार मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली है।
इस विस्तार के बाद योगी सरकार में मुख्यमंत्री और दोनों उपमुख्यमंत्रियों समेत कुल मंत्रियों की संख्या 62 तक पहुंच गई है। खास बात यह रही कि किसी भी मंत्री को हटाए बिना नए चेहरों को जगह दी गई। राजनीतिक गलियारों में इसे बीजेपी के “सोशल इंजीनियरिंग मॉडल” का हिस्सा माना जा रहा है।
भूपेंद्र चौधरी और मनोज पाण्डेय को मिली बड़ी जिम्मेदारी
पूर्व बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी पहले भी योगी सरकार के पहले कार्यकाल में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय के प्रभावशाली चेहरे माने जाने वाले चौधरी को कैबिनेट में शामिल कर बीजेपी ने पश्चिम यूपी को बड़ा संदेश देने की कोशिश की है।
वहीं समाजवादी पार्टी से अलग होकर बीजेपी के करीब आए मनोज कुमार पाण्डेय को कैबिनेट मंत्री बनाना भी राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। ब्राह्मण चेहरे के तौर पर उनकी एंट्री रायबरेली और आसपास के क्षेत्रों में बीजेपी की रणनीति को मजबूत करने वाली मानी जा रही है।
इसके अलावा दलित और पिछड़े वर्ग के नेताओं को भी मंत्रिमंडल में जगह देकर बीजेपी ने सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। फतेहपुर की विधायक कृष्णा पासवान, अलीगढ़ के विधायक सुरेंद्र दिलेर और वाराणसी के विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाकर पार्टी ने दलित और गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक को साधने का संकेत दिया है।
2027 चुनाव से पहले बीजेपी की बड़ी रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मंत्रिमंडल विस्तार पूरी तरह 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया गया है। 2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में बीजेपी को अपेक्षित प्रदर्शन नहीं मिला था, जिसके बाद पार्टी लगातार सामाजिक समीकरणों पर काम कर रही है।
बीजेपी का फोकस खास तौर पर गैर-यादव ओबीसी, दलित और क्षेत्रीय नेतृत्व को मजबूत करने पर दिखाई दे रहा है। योगी सरकार के इस विस्तार में पूर्वांचल, पश्चिमी यूपी और बुंदेलखंड के नेताओं को संतुलित प्रतिनिधित्व देने की कोशिश भी साफ नजर आई।
प्रदेश में बीजेपी के मौजूदा विधायकों के जातीय आंकड़ों को देखें तो पार्टी के पास बड़ी संख्या में ओबीसी, दलित और सवर्ण विधायक हैं। इसी सामाजिक आधार को मजबूत बनाए रखने के लिए मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल किया गया है। आने वाले समय में संगठन स्तर पर भी बड़े बदलावों की संभावना जताई जा रही है, जिससे बीजेपी 2027 के चुनावी मुकाबले के लिए खुद को और मजबूत कर सके।

