द लोकतंत्र/ देवरिया : भारत सरकार द्वारा खेलों को राष्ट्रीय कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR Policy 2026) प्राथमिकताओं में शामिल किए जाने के फैसले का संजीव सिंह आर्चरी इंस्टीट्यूट ट्रस्ट (SSAIT) ने स्वागत किया है। ट्रस्ट का कहना है कि यह निर्णय देश के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने, ग्रामीण प्रतिभाओं को अवसर देने और भारत को भविष्य की वैश्विक खेल शक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
वित्त मंत्रालय के अधीन लोक उद्यम विभाग (Department of Public Enterprises – DPE) ने वित्त वर्ष 2026-27 और 2027-28 के लिए केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (CPSEs) के CSR व्यय को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप दिशा देने संबंधी कार्यालय ज्ञापन जारी किया है। इसमें पहली बार ‘खेल गतिविधियों का विकास’ को तीन प्रमुख राष्ट्रीय CSR विषयों में शामिल किया गया है।
नई नीति के तहत खेल अवसंरचना, आधुनिक खेल उपकरण, खिलाड़ियों को पेशेवर प्रशिक्षण, खेलों के प्रचार-प्रसार तथा प्रतिभाओं के पोषण एवं विकास जैसे क्षेत्रों में CSR निवेश को विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। SSAIT का मानना है कि यह पहल भारत के दीर्घकालिक खेल विकास के लिए आधारशिला साबित हो सकती है।
CSR Policy 2026: खेलों में निवेश, भारत के भविष्य में निवेश – संजीव सिंह
SSAIT के संस्थापक, अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी, दो बार के ओलंपियन तथा अर्जुन और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित संजीव सिंह ने कहा कि हाल के वर्षों में यह भारतीय खेलों के लिए सबसे दूरदर्शी नीतिगत निर्णयों में से एक है। उन्होंने कहा कि खेलों को राष्ट्रीय CSR प्राथमिकता का दर्जा मिलने से सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को भारत के ओलंपिक भविष्य के निर्माण में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिलेगा। उनके अनुसार इससे जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं की पहचान, आधुनिक खेल विज्ञान, बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं और विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना के विकास में बड़े पैमाने पर निवेश का मार्ग प्रशस्त होगा।
संजीवा सिंह ने कहा कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सही संसाधन, प्रशिक्षक और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि आज खेलों में किया गया प्रत्येक CSR निवेश भविष्य में भारत के ओलंपिक पदकों और वैश्विक खेल उपलब्धियों में निवेश के समान होगा।
CSR Policy 2026: ग्रामीण खेल प्रतिभाओं पर रहेगा विशेष फोकस, CPSEs से सहयोग की अपील
SSAIT ने कहा कि नई CSR नीति ‘विकसित भारत @2047’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और राष्ट्रीय खेल नीति-2025 के उद्देश्यों के अनुरूप है। संस्था का मानना है कि इससे सरकारी प्राथमिकताओं और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। ट्रस्ट के अनुसार, उसके द्वारा विकसित ग्रामीण खेल मॉडल पहले ही सकारात्मक परिणाम दे चुका है। संस्था का दावा है कि संचालन के पहले ही वर्ष में उसके खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में 58 पदक जीते, जिनमें तीन इंडोर वर्ल्ड सीरीज़ स्वर्ण पदक भी शामिल हैं। SSAIT का कहना है कि यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल बेहतर अवसरों और संसाधनों की है।
संस्था ने यह भी बताया कि उसे पूर्व में इंडियन ऑयल, ओएनजीसी, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, एनटीपीसी, एसबीआई फाउंडेशन, टाटा स्टील, HSIL, STCI Finance Ltd. तथा ESSPL जैसी संस्थाओं का सहयोग मिल चुका है, जिसके माध्यम से ग्रामीण खेल अवसंरचना को विकसित करने का प्रयास किया गया। SSAIT ने सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों और कॉर्पोरेट संस्थाओं से अपील की है कि वे नई CSR नीति का लाभ उठाते हुए ओलंपिक स्तर की खेल अवसंरचना, हाई-परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स साइंस सेंटर, खिलाड़ियों के लिए छात्रवृत्तियां, अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल उपकरण, पेशेवर कोचिंग कार्यक्रम और ग्रामीण एवं वंचित बच्चों के लिए आवासीय खेल अकादमियों में निवेश करें।
संस्था का मानना है कि यदि सरकार, सार्वजनिक उपक्रम और निजी क्षेत्र मिलकर खेलों में दीर्घकालिक निवेश करते हैं, तो भारत न केवल ओलंपिक और पैरालंपिक में बेहतर प्रदर्शन करेगा, बल्कि ग्रामीण युवाओं को रोजगार, अवसर और नई पहचान भी मिलेगी। यही पहल भविष्य में भारत को विश्व के अग्रणी खेल राष्ट्रों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।



