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Dharmendra Pradhan को लेकर आई रिपोर्ट पर बीजेपी का खंडन, संबित पात्रा बोले- खबर पूरी तरह निराधार

BJP refutes report regarding Dharmendra Pradhan; Sambit Patra calls the news completely baseless.

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan को लेकर सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ा ऐतराज जताया है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने कथित तौर पर धर्मेंद्र प्रधान को मंत्रिमंडल से पूरी तरह हटाने के बजाय उनका मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, भाजपा ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह काल्पनिक और बेबुनियाद बताया है।

भाजपा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एक प्रतिष्ठित अखबार में प्रकाशित यह खबर तथ्यों पर आधारित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया था और इस तरह की रिपोर्ट से भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। संबित पात्रा ने कहा, एक आधिकारिक प्रवक्ता के तौर पर मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह रिपोर्ट पूरी तरह निराधार, काल्पनिक और बेबुनियाद है। किसी भी प्रकार के भ्रम की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

Dharmendra Pradhan को लेकर रिपोर्ट में क्या दावा किया गया था, CJP ने क्या कहा था?

इससे पहले कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रतिनिधिमंडल और केंद्र सरकार के बीच हुई बातचीत के दौरान धर्मेंद्र प्रधान को मंत्रिमंडल से हटाने के बजाय केवल उनका विभाग बदलने का प्रस्ताव सामने आया था। रिपोर्टों के अनुसार, CJP प्रतिनिधिमंडल ने इस कथित प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि उनकी मांग केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की है।

इन रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि CJP प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, सोनम वांगचुक की बिना शर्त रिहाई और NEET पेपर लीक से जुड़े कथित आत्महत्या मामलों के परिवारों को मुआवजा देने जैसी मांगें सरकार के सामने रखी थीं। हालांकि, भाजपा के ताजा बयान के बाद पार्टी ने मंत्रालय बदलने संबंधी किसी भी प्रस्ताव के अस्तित्व से ही इनकार कर दिया है। ऐसे में इस मुद्दे पर मीडिया रिपोर्टों और भाजपा के आधिकारिक रुख में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।

तीन दौर की बातचीत, विरोध प्रदर्शन और संसद में राजनीतिक घमासान

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP ने अपना विरोध प्रदर्शन समाप्त करने की घोषणा की थी। इससे पहले छात्र आंदोलन और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार और CJP के बीच कई दौर की बातचीत हुई थी। आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा हिरासत में लेने और बाद में अस्पताल में भर्ती किए जाने का मामला भी चर्चा में रहा। बाद में उन्हें अदालत के निर्देशों के बाद दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।

इसी दौरान विपक्ष ने भी छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आवाज उठाई और पुलिस पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग करने के आरोप लगाए। दूसरी ओर सरकार का कहना था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया, जब संसद में लोक परीक्षा (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा चल रही थी। सरकार के अनुसार, इस विधेयक का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े अपराधों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना तथा परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है।

भाजपा द्वारा मीडिया रिपोर्ट का खंडन किए जाने के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। एक ओर विपक्ष और आंदोलन से जुड़े संगठन अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं, वहीं भाजपा का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान के मंत्रालय बदलने संबंधी खबरों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे और आधिकारिक बयान राजनीतिक चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।

यह भी पढ़ें – ‘लोक परीक्षा संशोधन विधेयक’ पर Akhilesh Yadav का सरकार पर हमला, बोले- ‘एक प्रधान को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया’

Team The Loktantra

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