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Youth Unemployment: भारत में बढ़ रही डिग्री, लेकिन नहीं मिल रही नौकरी! 40 साल में 13 गुना बढ़े ग्रेजुएट, 1.1 करोड़ युवा बेरोजगार

Degrees are increasing in India, but jobs are not available! Graduates increased 13 times in 40 years, 1.1 crore youth unemployed

द लोकतंत्र/ नई दिल्ली : Youth Unemployment भारत में उच्च शिक्षा तक पहुंच लगातार बढ़ी है और पिछले चार दशकों में कॉलेजों व विश्वविद्यालयों से निकलने वाले ग्रेजुएट युवाओं की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि, शिक्षा के विस्तार के बावजूद रोजगार के अवसर उसी गति से नहीं बढ़ पाए हैं। इसका असर यह है कि आज बड़ी संख्या में डिग्रीधारी युवा नौकरी की तलाश में हैं।

स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2026 रिपोर्ट और पीरियॉडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1983 में 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग में करीब 50 लाख ग्रेजुएट थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 6.3 करोड़ हो गई है। यानी चार दशकों में ग्रेजुएट युवाओं की संख्या लगभग 13 गुना बढ़ी है। दूसरी ओर, इसी अवधि में बेरोजगार ग्रेजुएट्स की संख्या 7 लाख से बढ़कर 1.1 करोड़ तक पहुंच गई है।

रिपोर्ट इस बात की ओर संकेत करती है कि उच्च शिक्षा का दायरा तो तेजी से बढ़ा, लेकिन रोजगार सृजन की रफ्तार उससे पीछे रह गई। परिणामस्वरूप डिग्री हासिल करने के बाद भी लाखों युवाओं को लंबे समय तक रोजगार का इंतजार करना पड़ रहा है।

Youth Unemployment: हर तीन बेरोजगार युवाओं में दो ग्रेजुएट, नौकरी मिलने में बढ़ रहा इंतजार

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 1983 में बेरोजगार युवाओं में केवल हर आठवां व्यक्ति ग्रेजुएट था। अब स्थिति काफी बदल चुकी है और हर तीन बेरोजगार युवाओं में लगभग दो ग्रेजुएट हैं। यह बदलाव बताता है कि अब बेरोजगारी का दायरा शिक्षित युवाओं तक भी बड़ी तेजी से पहुंचा है। आंकड़ों के अनुसार, 25 वर्ष से कम आयु के ग्रेजुएट युवाओं में बेरोजगारी दर 1983 में 35 प्रतिशत थी, जो 2023 में बढ़कर 39.3 प्रतिशत हो गई। वहीं 25 से 29 वर्ष आयु वर्ग के ग्रेजुएट्स में बेरोजगारी दर 12.2 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंच गई।

रिपोर्ट के अनुसार, इसका मतलब यह है कि अब युवाओं को पढ़ाई पूरी करने के बाद पहले की तुलना में अधिक समय तक नौकरी का इंतजार करना पड़ रहा है। रोजगार मिलने की प्रक्रिया लंबी होती जा रही है, जबकि प्रतियोगिता लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा रिपोर्ट बताती है कि 2004 से 2023 के बीच देश में हर साल औसतन 50 लाख नए ग्रेजुएट तैयार हुए। इनमें से करीब 28 लाख युवाओं को किसी न किसी प्रकार का रोजगार मिला, लेकिन केवल 17 लाख लोगों को नियमित वेतन वाली नौकरी मिल सकी। बाकी युवाओं को या तो अस्थायी रोजगार मिला या वे बेरोजगार ही रहे।

राज्यों में बड़ा अंतर, महिलाओं की बेरोजगारी दर अधिक

रिपोर्ट यह भी बताती है कि ग्रेजुएट बेरोजगारी पूरे देश में समान नहीं है। अलग-अलग राज्यों में इसकी स्थिति काफी भिन्न दिखाई देती है। 30 वर्ष से कम आयु के पुरुष ग्रेजुएट्स में बेरोजगारी दर दिल्ली में 8.8 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि ओडिशा में यह 40.3 प्रतिशत तक पहुंच गई। महिला ग्रेजुएट्स की स्थिति कई राज्यों में और अधिक चुनौतीपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 73.5 प्रतिशत, तेलंगाना में 52.3 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 51.6 प्रतिशत महिला ग्रेजुएट बेरोजगार हैं। राष्ट्रीय स्तर पर पुरुष ग्रेजुएट्स की बेरोजगारी दर 25.1 प्रतिशत, जबकि महिलाओं की 36.6 प्रतिशत दर्ज की गई है।

हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि नौकरी मिलने के बाद ग्रेजुएट्स की औसत आय अब भी गैर-ग्रेजुएट कर्मचारियों की तुलना में अधिक रहती है। यानी डिग्री का आर्थिक लाभ पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, लेकिन रोजगार हासिल करने में पहले से ज्यादा समय लग रहा है और शुरुआती वेतन वृद्धि की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल उच्च शिक्षा का विस्तार पर्याप्त नहीं है। इसके साथ उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप स्किल डेवलपमेंट, नए रोजगार सृजन, निजी निवेश और रोजगारोन्मुख शिक्षा पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। तभी बढ़ती शिक्षित युवा आबादी को बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकेंगे और देश की जनसांख्यिकीय क्षमता का प्रभावी उपयोग हो सकेगा।

यह भी पढ़ें – Dharmendra Pradhan को लेकर आई रिपोर्ट पर बीजेपी का खंडन, संबित पात्रा बोले- खबर पूरी तरह निराधार

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