द लोकतंत्र / नई दिल्ली : Jantar Mantar पर हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द कराने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। केंद्र ने शीर्ष अदालत से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्ति का इस्तेमाल करते हुए मामलों को खत्म करने का अनुरोध किया है। सोमवार, 31 अगस्त को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने इस मामले का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सरकार छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामले में एक आवेदन दाखिल करने जा रही है और आग्रह किया कि इसकी सुनवाई मंगलवार को ही की जाए।
सॉलिसिटर जनरल की बात सुनने के बाद CJI सूर्य कांत ने पूछा कि क्या मामले की तत्काल सुनवाई जरूरी है। इस पर तुषार मेहता ने बताया कि पक्षकारों के बीच मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की स्थिति बन रही है। CJI ने कहा कि यदि पक्षकार आपसी सहमति से समाधान की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं तो अदालत को इसमें कोई आपत्ति नहीं है। इसके बाद पीठ ने मामले को 1 सितंबर को सुनवाई के लिए लगाने पर सहमति जताई।
अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट से राहत की मांग
संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को किसी मामले में ‘पूर्ण न्याय’ करने के लिए आवश्यक आदेश पारित करने की विशेष शक्ति देता है। केंद्र ने इसी संवैधानिक प्रावधान के तहत प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने की मांग की है। यह मामला जुलाई में हुए छात्र आंदोलन और उसके बाद दर्ज FIR से जुड़ा है। सरकार पहले भी सुप्रीम कोर्ट में यह स्पष्ट कर चुकी है कि वह छात्रों और आम नागरिकों को राहत देने के पक्ष में है। हालांकि, सरकार का कहना रहा है कि आंदोलन के दौरान शामिल हुए आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस नहीं लिया जाएगा।
ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। अदालत के फैसले से यह स्पष्ट हो सकता है कि किन प्रदर्शनकारियों को FIR में राहत मिलेगी और किन मामलों में कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
5 सितंबर के मार्च से पहले बढ़ी हलचल
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) से जुड़े लोगों ने 5 सितंबर को इंडिया गेट के आसपास मार्च निकालने का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जुलाई में आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से किए गए कुछ वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। इनमें आंदोलनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की मांग भी शामिल है। ऐसे में केंद्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट में FIR रद्द करने को लेकर आवेदन दाखिल किया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब 1 सितंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है, इस पर आंदोलन से जुड़े लोगों और सरकार दोनों की नजर रहेगी।




